नोट : संशोधित खबर
फोटो-- नक्शा भानु
फ्लैग- रामगंगा बैराज, बरेली से बदायूं नहर प्रोजेक्ट
3 साल पहले पूरा होना था प्रोजेक्ट, अब 2 साल तक भूल जाइए
बाढ़ खंड ने छह गुनी लागत का एस्टीमेट भेजा, अब तक नामंजूर
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली। रामगंगा की बदायूं नहर परियोजना सात साल पहले शुरू हुई थी। रुहेलखंड मंडल की सबसे बड़ी परियोजनाका उद्देश्य बरेली से दातागंज (बदायूं) तक किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी उपलब्ध कराने के लिए 15.6 किलोमीटर लंबी मुख्य नहर के अलावा डेढ़ दर्जन रजबहा और माइनजर नहरें निकालना था। दो साल से इस प्रोजेक्ट पर बजट के अभाव में काम ही बंद है। बाढ़ खंड और बदायूं सिंचाई परियोजना से बढ़ाकर भेजे गए एस्टीमेट पर शासन ने अब तक नया बजट मंजूर नहीं किया है। पुराने बजट में भी 40 करोड़ रुपये नहीं मिले। अब कम से कम दो साल तक इस परियोजना को भूलना पड़ेगा, क्योंकि इतने समय तक प्रोजेक्ट पूरा होने के कोई आसार नजर नहीं आ रहे।
रामगंगा पर 617 मीटर लंबे बैराज निर्माण और बरेली से बदायूं तक 15.6 किलोमीटर लंबी मुख्य नहर के अलावा दो दर्जन माइनर नहरों के निर्माण के लिए वर्ष 2011 में करीब 630 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए थे। बाढ़ खंड बदायूं, बाढ़ खंड बरेली, बदायूं सिंचाई परियोजना बरेली और बदायं सिंचाई परियोजना बदायूं (चार एजेंसियों) ने मिलकर एस्टीमेट स्वीकृत कराए थे। बैराज का निर्माण लगभग 85 फीसदी तक पूरा हो चुका है। नहर निर्माण के लिए एजेंसियों को 100 हेक्टेअर से ज्यादा जमीन खरीदनी है। किसान इसकी कीमत सर्किल रेट से चार गुना लेने के बाद ही अपनी जमीन देने पर सहमत हैं। शासन को संशोधित एस्टीमेट भेजकर 2208.22 करोड़ बजट की डिमांड की गई है, मगर अभी पुराने 630 करोड़ में से ही 40 करोड़ रुपये नहीं मिल पाए। कुछ ठेकेदार भी प्रोजेक्ट से हाथ खड़े करने लगे हैं, जबकि यह प्रोजेक्ट 2015 में पूरा होना था।
बैराज के लिए चाहिए 150 करोड़
रामगंगा पर बैराज निर्माण का काम पूरा करने के लिए ही बाढ़ खंड को कम से कम 150 करोड़ रुपये चाहिए। फिर नहर बनाने के लिए बरेली से बदायूं के बीच 1222 पक्के निर्माण जैसे पुलिया, टेल आदि बनने हैं। इसमें लगभग 90 फीसदी काम होना बाकी है। बजट न मिलना और जमीन अधिग्रहण में पेच फंसा होने से नहर निर्माण का काम आगे नहीं बढ़ पा रहा है।
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अगर बाढ़ खंड को 2011 में पूरा बजट मिल जाता तो हम 630 करोड़ में ही प्रोजेक्ट पूरा कर देते। बजट समय पर न मिलने से लागत बढ़ती गई। खासतौर से जमीन की लागत बढ़ गई। मैं बजट लाने के लिए प्रयास कर रहा हूं। दिनेश सिंह सचान, अधीक्षण अभियंता बाढ़ खंड