औद्योगिक विकास मंत्री नितिन अग्रवाल ने करगैना स्थित पराग डेयरी को 108 करोड़ से आधुुनिक बनाने के प्रोजेक्ट का शिलान्यास किया। जिसको आधुनिक बनाने के लिए भारतीय डेयरी मशीनरी कंपनी लिमिटेड आनंद (गुजरात) को पहले फेज में 42.53 करोड़ रुपये रिलीज करके उत्पादन शुरू कराने की जिम्मेदारी सौंपी है। जिसमें एक लाख लीटर दूध से उत्पाद बनाने की क्षमता होगी। आधुुनिकीकरण के लिए बरेली की एक मात्र पराग डेयरी ही नहीं बल्कि प्रदेश के 15 जिलों की खस्ता हाल डेयरियां आधुुनिकीकरण में शामिल हैं। शिलान्यास समारोह को संबोधित करते हुए मंत्री नितिन अग्रवाल ने प्रदेश सरकार की उपलब्धियों का जिक्र किया। डीएम गौरव दयाल ने कहा कि इस डेयरी के चालू होने से दुग्ध उत्पादकों और उपभोक्ताओं को लाभ और युवाओं को रोजगार मिलेगा। दुग्ध संघ के अध्यक्ष लल्लू सिंह यादव ने इस डेयरी के चालू कराने को किए आंदोलन की जानकारी दी। सपा जिलाध्यक्ष वीरपाल सिंह यादव ने कहा कि एक साल में इस डेयरी में दूध के सभी उत्पादन शुरू हो जाएंगे। कार्यक्रम में महानगर अध्यक्ष जफर बेग, डेयरी के जीएम डीके वर्मा आदि मौजूद थे।
चुनावी स्टंट तो नहीं डेयरी का आधुनिकीकरण
वादा करने के बावजूद चार साल तक चुप्पी साधी
करगैना स्थित पराग डेयरी का आधुनिकीकरण कहीं चुनावी स्टंट तो नहीं है। चार साल के दौरान सपा सरकार इस डेयरी को चालू नहीं करा पाई, आखिरी साल में इतनी धनराशि रिलीज करके एक साल में उत्पादन शुरू कराने के दावे पर विश्वास नहीं होता।
बसपा शासन काल के दौरान फरवरी 2010 में इस डेयरी के घाटे में होने के कारण बंदी की घोषणा की गई थी। कर्मचारियों ने आंदोलन किए लेकिन सुनवाई नहीं हुई। उन दिनों सपा के प्रदेशाध्यक्ष अखिलेश यादव बरेली आए और उन्होंने आंदोलन की अगुवाई करने वाले दुग्ध संघ के अध्यक्ष लल्लू सिंह यादव से वादा किया था कि उनकी सरकार बनी तो इस डेयरी को जरूर चलाएंगे। कर्मचारियों को काम मिलेगा। प्रदेश में सपा को बहुमत मिला और अखिलेश यादव मुख्यमंत्री बने।
इस डेयरी को चालू कराने की फरवरी 2013 में घोषणा की गई। मशीनरी सही कराने के लिए धनराशि रिलीज हुई। बकाए का भुगतान कराके 20 कर्मचारियों को काम पर भी लिया गया लेकिन उत्पादन शुरू नहीं हो सका। यहां पर सिर्फ दूध कलेक्शन सेंटर बना और इस समय यह दूध को मेरठ स्थित पराग डेयरी में भेजा जा रहा है।
मंगलवार को आधुनिकीकरण के लिए शिलान्यास हुआ। उस समय आईडीएमसी और पराग डेयरी के अधिकारियों को यह जानकारी तक नहीं थी कि इस प्रोजेक्ट के लिए आईडीएमसी को कितनी धनराशि रिलीज की गई है। करीब चार साल तक सपा की सरकार रही, तब इस डेयरी के आधुनिकीकरण पर जोर दिया नहीं। अब विधानसभा चुनाव में 10 महीने रह गए हैं तब जाकर इस डेयरी के आधुनिकीकरण के लिए शिलान्यास की याद आई। जिस तरह से इस डेयरी में एक साल बाद उत्पादन शुरू होने की घोषणा की गई है, ऐसा संभव नजर नहीं आ रहा है कि एक साल में उत्पादन शुरू हो जाएगा।