बरेली। ग्रामीण क्षेत्रों में मनरेगा योजना (अब विकसित भारत ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना) से संचालित 10,338 कार्य बंद हो सकते हैं। फिलहाल, 30 फीसदी से कम प्रगति वाले कार्यों का अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी (एपीओ) एपीओ व तकनीकी सहायकों से सर्वे कराया जा रहा है। विभाग का दावा है कि अब जो भी नए कार्य होंगे, उसमें श्रमिकों के मरटर रोल वीबी जीरामजी योजना के तहत जारी होंगे। हालांकि, इसके सॉफ्टवेयर पर अब भी मनरेगा ही लिखकर आ रहा है।
जिले के 15 ब्लॉकों में 15 एपीओ व 47 तकनीकी सहायकों के जरिये सर्वे कराया जा रहा है। प्रत्येक तकनीकी सहायक 20-25 गांवों को देख रहे हैं। इनको उनके क्षेत्र में चल रहे कार्यों की सूची दे दी गई है। वह इस बात का आकलन कर रहे हैं कि कौन सा कार्य पूर्ण कराया जा सकता है और कौन सा नहीं। एक सप्ताह में इनको रिपोर्ट देनी होगी। उसी के आधार पर निर्णय लिया जाएगा।
42 करोड़ है बकाया
जिले में मनरेगा के तहत 50 करोड़ पारिश्रमिक बकाया था। 20 दिन पहले इसमें से आठ करोड़ रुपये मिले हैं, जिसे मजदूरों के खातों में हस्तांतरित किया जा रहा है। अब भी 42 करोड़ रुपये बकाया हैं।
वर्जन
30 फीसदी से कम प्रगति वाले कार्यों का सर्वे कराया जा रहा है। कार्य होगा या नहीं, इसका निर्णय रिपोर्ट के आधार पर लिया जाएगा। - हसीब अंसारी, उपायुक्त मनरेगा