बरेली। बारिश और ठंडी हवाओं से मौसम तो सर्द हो गया है, लेकिन देवचरा में आने वाले दो दिन भीषण सियासी गर्मी लेकर आएंगे। 20 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुनावी सभा से पहले 19 अप्रैल को यहीं मायावती की सभा का कार्यक्रम तय था, लेकिन अब तय हुआ कि इस सभा में सपा मुखिया भी उनके साथ होंगे। लोगों के बीच इसके बाद चर्चा शुरू हो गई है कि 23 अप्रैल को होने वाले मतदान का नतीजा जब आएगा तब आएगा, फैसला तो भाजपा और गठबंधन की चुनावी सभाओं के बाद ही हो जाएगा।
आंवला में भाजपा, सपा-बसपा गठबंधन और कांग्रेस प्रत्याशियों के बीच त्रिकोणीय मुकाबले को देखते हुए कोई भी दल कोर कसर बाकी नहीं रखना चाहता। भाजपा ने जहां अपने प्रत्याशी के पक्ष में चुनाव प्रचार को धार देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 20 अप्रैल का चुनावी सभा लगाकर विरोधी दलों को चिंता में डाल दिया। सूत्रों की मुताबिक भाजपा की इस चालाकी को भांपते हुए ही बसपा ने संयुक्त चुनावी सभा करने की योजना बना ली। पहले मायावती देवचरा में अकेले ही चुनावी सभा करने वाली थीं। बताया जाता है कि बदायूं में 13 अप्रैल को माया और अखिलेश की संयुक्त सभा थी। उसमें जुटी भीड़ को देखते हुए बसपा की ओर से भी अकेले मायावती के बजाय अखिलेश यादव के साथ गठबंधन की संयुक्त चुनावी सभा करने की मांग की गई थी। मायावती ने भी इस पर अपनी सहमति दे दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 20 अप्रैल को होने वाली चुनावी सभा की तुलना में अब गठबंधन की संयुक्त सभा में जुटने वाली भीड़ से होना तय है। ऐसे में अगले दो दिन तक इस बात की होड़ भी देखने को मिलेगी कि भीड़ के लिहाज से गठबंधन की सभा भारी रहती है या फिर पीएम मोदी की। सपा-बसपा गठबंधन और भाजपा के नेता और कार्यकर्ता एक दूसरे को भीड़ के लिहाज से पीछे करके मतदान से पहले मनोवैज्ञानिक बढ़त बनाने की जुगत में लग गए हैं।