बरेली। पाकिस्तान के बालाकोट में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी ट्रेनिंग कैंप पर हमला करने की वायुसेना की रणनीति में बरेली का त्रिशूल एयरबेस की भी प्रमुख भूमिका रही। आतंकी कैंप को तबाह करने निकले वायुसेना के कुछ फाइटर जेट मिराज 2000 त्रिशूल एयरबेस से भी उड़े। सूत्रों के मुताबिक ये विमान कई दिन पहले ही ग्वालियर के एयरबेस से यहां भेज दिए गए थे। वायुसेना की रणनीति के तहत मिराज विमानों को कवर देने के लिए सुखोई विमानों को भी स्टैंड बाई रखा गया था। एयरबेस से रात दो बजे के बाद उड़ान भरने वाले ये विमान मंगलवार दोपहर को एयरबेस पर लौटे।
त्रिशूल एयरबेस पर सोमवार की रात काफी हलचल भरी रही। रात दो बजे शुरू हुई फाइटर जेट विमानों की गड़गड़ाहट असामान्य तौर पर देर तक जारी रही तो आसपास रहने वाले लोगों का ध्यान बरबस उधर चला गया। इन लोगों के मुताबिक उन्होंने देखा कि त्रिशूल से एक के बाद एक कई विमानों ने उड़ान भरी। इसके बाद भी कुछ विमानों के इंजन देर तक गरजते रहे। माना जा रहा है कि सुखोई विमानों की आवाज थी जिन्हें मिराज विमानों के हमले के लिए रवाना होने के बाद स्टैंड बाई में रखा गया था। एयरफोर्स स्टेशन के नजदीक रहने वाले असलम, अजय, राहत और शाहिद आदि ने बताया कि सुबह जब बालाकोट में भारतीय वायुसेना की खबर टीवी पर आनी शुरू हुई तब उन्हें एहसास हुआ कि इस हमले के लिए ही फाइटर जेट आधी रात के बाद त्रिशूल एयरबेस से उड़े थे। कुछ देर टीवी चैनलों पर भी खबर आने लगी कि मिराज विमानों ने बरेली और आगरा एयरबेस से उड़ान भरी थी। हालांकि एयरफोर्स की ओर से अधिकृत तौर पर इस एयर स्ट्राइक के बारे में कोई बयान जारी नहीं किया है। यह भी पुष्टि नहीं हो सकी कि यहां से कितने विमानों ने उड़ान भरी।
.. तो इसलिए रद्द हुआ जेट एयरवेज की टीम का दौरा
जेट एयरवेज की टीम को नाथ नगरी एयर टर्मिनल से व्यावसायिक उड़ानें शुरू करने से पहले यहां दौरा करने आना था। करीब हफ्ता भर पहले ही घोषणा कर दी गई थी कि यहां से 28 फरवरी को व्यावसायिक उड़ानें शुरू कर दी जाएंगी, इसलिए बताया गया था कि जेट एयरवेज की टीम को लेकर उसका 180 सीटर बोइंग विमान यहां 24 या 25 फरवरी को लैंड करेगा। सूत्रों के मुताबिक वायुसेना की ओर से इस विमान को त्रिशूल एयरबेस के रनवे पर उतरने की अनुमति ही नहीं मिल पाई। अब माना जा रहा है कि चूंकि वायुसेना की बालाकोट में हवाई हमले के लिए बनी रणनीति में त्रिशूल एयरबेस की भूमिका तय हो चुकी थी। इसी कारण इस एयरबेस की सभी हवाई पट्टियों को सिर्फ वायुसेना की उड़ानों के लिए आरक्षित कर दिया गया था।
किसी भी हमले के लिए तैयार
एयर स्ट्राइक के बाद पाकिस्तान की संभावित रणनीति से निपटने के लिए एयरफोर्स और सेना की सभी डिविजनों के साथ आईटीबीपी और बीएसएफ को भी हाई अलर्ट पर रखा गया है। सूत्रों के मुताबिक त्रिशूल एयरफोर्स स्टेशन और सेना की सभी डिविजनों को किसी भी आकस्मिक स्थिति के लिए तैयार रहने को कहा गया है। सेना की गरुड़ डिविजन और 6 माउंटेन डिविजन के जांबाज अलर्ट पर हैं। एयरफोर्स स्टेशन को स्नाइपर्स ने अपने घेरे मेें ले लिया है।