लाभार्थियों के खातों की फर्जी रिपोर्ट आने से शौचालय निर्माण का करीब तीन करोड़ रुपया फंस गया है। पंचायतीराज विभाग की तरफ से ये रकम बैंकों में भेजी गई थी लेकिन अकाउंट नंबर सही न होने से धनराशि लाभार्थियों के खातों में जाने के बजाय डंप हो गई, जबकि जिला प्रशासन पर जिले को दो अक्तूबर तक खुले में शौचमुक्त यानी ओडीएफ करने का दबाव है। खास बात यह है कि फर्जीवाड़ा करने वाले पंचायत सेक्रेटरी, एडीओ सहित अन्य जिम्मेदारों पर अब तक कोई कार्रवाई भी नहीं की गई है।
पंचायतीराज विभाग शौचालयों के निर्माण के लिए लाभार्थियों को 12 हजार की रकम दो किस्तों में देता है। हाल में शौचालयों के निर्माण की रकम लाभार्थियों के खाते में सीधे भेजने के लिए उनके अकाउंट नंबर मांगे गए थे। इसकी जिम्मेदारी सफाई कर्मचारियों के साथ ही पंचायत सचिव और एडीओ (पंचायत) को सौंपी गई थी। पंचायतीराज विभाग के इस स्टाफ ने लाभार्थियों से खातों के नंबर लेने के बजाय घर बैठकर ही मनमाने ढंग से फर्जी रिपोर्ट तैयार करके भेज दी। इसी रिपोर्ट के आधार पर विभाग ने डाटा तैयार किया और एक किस्त के तौर पर करीब पांच हजार लाभार्थियों के खाते में तीन करोड़ की धनराशि स्थानांतरित कर दी। फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ, जब बैंकों ने इस धनराशि को अपने पास डंप कर लिया। अब विभाग इन हजारों खातों को सही कराने के लिए माथापच्ची कर रहा है। दो अक्तूबर तक शौचालयों के निर्माण का लक्ष्य पूरा कराया जाना है।
तमाम गांवों में सामने आई गड़बड़ी
शेरगढ़ ब्लॉक के घाटगांव में 301, रामपुर में 219, नगरियाकलां में 206, रहपुरा घनश्याम में 164, सिमरना में 99, बचन में 161 लोगों को शौचालय निर्माण की रकम भेजी गई थी। इसी तरह भुता ब्लॉक के लाडपुर मुडिया में 196, पडौली में 179, ककराकलां में 136, मिर्जापुर में 106, रिक्षा में 98, नवाबगंज ब्लॉक के औरंगाबाद में 36, कल्यानपुर हिकमत अली में 135, गुड़गांवा में 93 लोगों को शौचालयों बनाने की धनराशि भेजी गई थी। इसके अलावा अन्य ब्लॉकों के सैकड़ों गांवों में लाभार्थियों को धनराशि भेजी गई थी लेकिन उनके खाते ही सही नहीं निकले।
जिन खातों में गड़बड़ी सामने आई है, उन्हें सही कराने का काम युद्घस्तर पर कराया जा रहा है, ताकि उनके खातों में जल्द से जल्द धनराशि का ट्रांसफर हो सके। - विनय कुमार सिंह, डीपीआरओ