साल 2011 में 10 जून को निघासन थाने में किशोरी सोनम की हुई हत्या की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हेरफेर करने वाले तीन सरकारी डॉक्टरों को तीन-तीन साल कैद की सजा सुनाई गई है। सीजेएम कोर्ट में सजा सुनाए जाने के बाद हिरासत में लिए गए तीनों डॉक्टरों को अपील दाखिल करने के लिए 30 दिन का समय देते हुए शाम को जमानत रिहा कर दिया गया।
थाना परिसर के एक पेड़ से सोनम का शव लटका मिलने के बाद इन डॉक्टरों के पैनल ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट में आत्महत्या की बात लिखी थी, जबकि तीन दिन बाद ही दोबारा हुए पोस्टमार्टम में हत्या की बात स्पष्ट हो गई थी। कब्र से निकाले गए शव का लखनऊ से आए चार डॉक्टरों की टीम ने दोबारा पोस्टमार्टम किया था। इसमें गला दबाकर मारने की बात कही गई थी और शरीर पर चार जगह चोट के निशान बताए गए थे। इसके बाद सीबीसीआईडी ने डॉ. अरुण कुमार शर्मा, डॉ. सुरेंद्र प्रताप सिंह और डॉ. अजय अग्रवाल के खिलाफ 12 जुलाई को रिपोर्ट लिखाई थी। 21 अप्रैल 12 को चार्जशीट दाखिल की गई थी।
सीजेएम सुनील प्रसाद ने शुक्रवार को अपना फैसला सुनाते हुए तीनों डॉक्टरों को दोषी करार दिया और उन्हें तीन-तीन साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। साथ ही तीनों पर दस-दस हजार रुपये का जुर्माना लगाया।
यह था मामला-
भैंस चराने के लिए घर से निकली सोनम की थाना परिसर में हत्या कर दी गई थी। शव पेड़ से जरूर लटका मिला, मगर तमाम सवाल उठने के बाद जिला प्रशासन ने पहल करते हुए दोबारा पोस्टमार्टम कराया। हत्या की रिपोर्ट में सीओ के गनर व एक अन्य सिपाही अभियुक्त बने, यह मुकदमा न्यायालय में अभी विचाराधीन है।