अदालत को नसीहत देकर फंसे रिठौरा चौकी इंचार्ज
कोर्ट ने इसे अदालत के काम में दखलंदाजी मानकर चार जून को तलब किया
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली। रंगदारी वसूलने के एक मामले अदालत के रिपोर्ट मांगने पर रिठौरा पुलिस चौकी इंचार्ज ने नसीहत दे डाली। कहा, इस मामले में किसी कार्रवाई की जरूरत ही नहीं है। कोर्ट ने इसे अदालत की कार्यवाही में दखलंदाजी मानते हुए उन्हें चार जून को तलब किया है। अदालत ने उन्हें आदेश दिया है कि वह कोर्ट में हाजिर बताएं कि उन्होंने किस अधिकार से ऐसा कहा है। मामला एसीजेएम अनिल कुमार की अदालत का है।
कस्बा रिठौरा के मोहल्ला खेड़ा निवासी निजाम उद्दीन ने कोर्ट में अर्जी देकर कहा कि उसके भाई का लड़का एक लड़की के साथ 10 अप्रैल 2018 को लापता हो गया था। इसका मुकदमा दर्ज कराया गया। इस मामले में लड़की पक्ष के लोगों ने जानबूझ कर दबाव बनाने और रुपये ऐंठने के मकसद से रिपोर्ट में निजामउद्दीन का भी नाम दर्ज करा दिया, जबकि उसका इस घटना से कोई लेना देना नहीं है। रिपोर्ट दर्ज होने के बाद लड़की पक्ष के कुछ लोग निजामुद्दीन के घर आए और कहा कि मुकदमे से बचना चाहते हो तो पांच लाख रुपये दो नहीं तो तुम्हें जेल भिजवा देंगे। इस मामले में अदालत ने थाना हाफिजगंज पुलिस से विस्तृत रिपोर्ट मांगी। इस पर चौकी इंचार्ज रिठौरा सकतावत सिंह ने अदालत को भेजी रिपोर्ट में यह भी लिख दिया कि इस अर्जी पर किसी कार्रवाई की जरूरत नहीं है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि सकतावत सिंह की यह टिप्पणी स्पष्ट रूप से अदालत के काम में प्रत्यक्ष तौर पर दखलंदाजी है। कानून के किसी भी प्रावधान में पुलिस को यह अधिकार हासिल नहीं है कि वह इस स्तर की टिप्पणी या निर्देश अंकित करे कि अदालत को क्या करना चाहिए और क्या नहीं। अदालत ने रिठौरा चौकी इंचार्ज सकतावत सिंह को चार जून को कोर्ट में हाजिर होकर यह बताने का आदेश दिया है कि उन्होंने किस अधिकार से अदालत के काम में हस्तक्षेप किया।