जिला अस्पताल की बर्न यूनिट में मरीज बेहाल हैं। यहां एसी खराब है और पंखाें में रफ्तार नहीं है। मरीज किराए के पंखे लाकर यहां इलाज करवा रहे हैं। वार्ड में भर्ती मरीजों के तीमारदारों ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से एसी खराब था, बृहस्पतिवार को इसे बनवाया गया है। एक ही एसी होने के चलते इसका असर नहीं हो रहा है। अस्पताल स्टाफ का कहना है कि कमरे में तीमारदाराें का बार-बार आना जाना लगा रहता है इसकी वजह से ठंडक नहीं रहती है।
15 बेड की बर्न यूनिट में मौजूदा समय में चार पुरुष मरीज और तीन महिला मरीज भर्ती हैं। वार्ड के बाहर शौचालय है, जहां से पानी फर्श पर आता रहता है। यहां से तीमारदार और मरीज आते-जाते हैं तो गंदगी कमरे तक जाती है। सफाई भी चौबीस घंटे में सिर्फ एक-दो बार ही होती है। वार्ड का दरवाजा वैसे तो हर वक्त बंद रहता है, लेकिन तीमारदाराें का आना-जाना लगता रहता है। पुरुष वार्ड के बेड नंबर एक पर भर्ती संभल के राजू का शरीर 20 फीसदी से अधिक जला है। राजू को परेशानी न हो, इसलिए तीमारदारों ने टेबिल फैन लगा रखा है। बेड नंबर दो पर भर्ती मरीज ने भी फर्राटा पंखा लगाया है। महिला वार्ड में भी एसी चल रहा है, लेकिन तापमान ज्यादा कम नहीं कर पाता है। प्रमुख अधीक्षक डॉ. केएस गुप्ता का कहना है कि उनकी जानकारी में एसी खराब होने की बात आई थी, जिसे तुरंत ठीक करा दिया गया है।
इंफेक्शन का बना रहता है डर
विशेषज्ञों का कहना है कि जले हुए मरीजों को काफी साफ-सफाई और ठंडे वातावरण में रहने की जरूरत पड़ती है। इसलिए जिस कमरे में उनका इलाज किया जा रहा है, वहां का तापमान भी 22 से 25 डिग्री के बीच होना चाहिए। इंफेक्शन से बचने के लिए वहां किसी का आना-जाना न हो और कमरे के दरवाजे खिड़की बंद होने चाहिए।