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भारतीय संस्कृति व परंपराओं को जाने व समझें युवा

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बाराबंकी। पाश्चात्य सभ्यता से प्रभावित होकर युवा पीढ़ी भारतीय संस्कृति और परंपराओं से दूर होती जा रही है। ऐसे में लोकनृत्य व लोक संस्कृति को बढ़ावा देने वाले आयोजनों की जरूरत समय की मांग है। बृहस्पतिवार को मुंशी रघुनंदन प्रसाद सरदार पटेल महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में ये बातें मुख्य अतिथि उमाशंकर वर्मा मुन्नू भैय्या ने कही। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन निश्चित ही हमारी सभ्यता को संस्कारित करेंगे।
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कालेज में भारतीय लोक नृत्य पर संगोष्ठी एवं लोक नृत्यों की मंचीय प्रस्तुति उद्गार वेलफेयर सोसायटी की ओर से हुई। भारतीय लोकनृत्य, चरकुला, स्वांग, ख्याल और रासलीला की मनमोहक प्रस्तुतियां हुई। जूही कुमारी, विशु पांडेय, पीहू गुप्ता, शीलू मलिक, दिव्यांशी मौर्या, एषा द्विवेदी, प्रीति कश्यप, तारा उप्रेती ने प्रस्तुतियां दी।
संस्था के निर्देशक अभिनेता, लेखक एवं रंगकर्मी चंद्रभाष सिंह ने कहा कि नई पीढ़ी अगर अपनी लोक कलाओं को नहीं जानेगी समझेगी तो एक दिन ये समाप्त हो जाएगी। महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. ऊषा चौधरी, संस्था की अध्यक्ष वंदना तिवारी, डॉ. आरती श्रीवास्तव, मोनिका तिवारी, डॉ. रचना श्रीवास्तव, डॉ. पुष्पा वर्मा, डॉ. अमिता सिंह, डॉ. दिव्या गुप्ता, शशि द्विवेदी, रिमझिम, उर्मिला व सविता पांडेय मौजूद रही।
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