बाराबंकी। स्थानीय ब्लॉक क्षेत्र की बागों में इन दिनों आम की धूम है। इनमें सबसे ज्यादा लोकप्रिय आम याकूती है, जिसे देश ही नहीं विदेश में भी ख्याति मिली है। यह आम अपने अनोखे स्वाद और खुशबू के कारण अपनी अलग पहचान बना चुका है।
लखनऊ के मलिहाबाद के बजाय के बाद यहां बड़ागांव, भयारा, बिंदौरा, मसौली, रानी बाजार, सआदतगंज समेत कई गांव आम पट्टी के रूप में प्रसिद्ध हैं। दशहरी भी खूब पैदा होता है लेकिन याकूती से इलाके की पहचान है। बड़ागांव निवासी बागवान महबूब उर रहमान किदवई ने इसकी उत्पत्ति बताई। उनके पूर्वजों ने कई दशक पहले बशीर बाग में इसे विकसित किया था।
यह किस्म लीची के पेड़ पर विशेष कलम बांधकर तैयार की गई थी। वर्तमान में बड़ागांव के बागों में याकूती आम के लगभग 125 पेड़ मौजूद हैं। भयारा निवासी अलीम किदवई और सईद अहमद किदवई ने इसकी विशेषता बताई। कहा कि याकूती आम का रस पतला होता है। इसमें मिठास के साथ हल्का खट्टापन भी होता है।
यह गुण इसे अन्य आम की किस्मों से अलग बनाता है और स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है। बसवाड़ी बाग में आम बेचने वाले तौफीक आलम ने ग्राहकों की पहली पसंद याकूती आम को बताया। उनके बाग में हुस्नआरा, दशहरी और लंगड़ा सहित अनेक किस्में उपलब्ध हैं। चंद्रकला मिठाई की तरह याकूती आम की मांग भी लगातार बनी रहती है।