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अस्पताल में महिला की मौत, हंगामा

Sun, 06 Aug 2017 11:38 PM IST
अमर उजाला/बाराबंकी
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मेले के समापन पर झोड़ों का गायन करती महिलाएं। - फोटो : अमर उजाला
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न्यू पीएचसी बदोसरायं में रविवार भोर इलाज के दौरान प्रसूता की मौत हो गई। परिवारीजनों ने डॉक्टर व एएनएम पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया। उनका आरोप है कि डॉक्टर खुद ड्यूटी से गायब रहा और एएनएम प्रसव कराने के बाद वह प्रसूता का दोबारा देखने तक नहीं आई। परिवारीजनों के हंगामा करने पर एएनएम ने अपनी जान छुड़ाने के लिए प्रसूता को सीएचसी सिरौलीगौसपुर रेफर कर दिया। जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। परिवारीजनों ने मामले की शिकायत सीएमओ से की है। 
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कोतवाली बदोसरायं क्षेत्र के ग्राम दरिगापुर निवासी सुमन (30) को शनिवार शाम 8.30 बजे प्रसव पीड़ा शुरू हुई। पति भूपेंद्र वर्मा ने आशा बहू पुष्पा देवी के साथ बाइक से प्रसूता को लेकर न्यू पीएचसी पहुंचा। जहां चिकित्सक नदारत मिले।

पति ने बताया कि ड्यूटी पर तैनात एएनएम राधिका देवी ने भर्ती कर लिया। रात 1.30 बजे प्रसूता ने सामान्य प्रसव से एक बच्चे को जन्म दिया। प्रसव के बाद एएनएम प्रसूता को ग्लूकोज लगाकर अपने आवास चली गई। सुबह चार बजे अचानक प्रसूता के पेट में तेज दर्द के साथ शरीर ठंडा पड़ने लगा तो इसकी सूचना देने पति एएनएम आवास पर गया, तो उसने थोड़ी देर में आने को कहा।
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इसी बीच हालत ज्यादा बिगड़ने पर परिवारीजनों ने हंगामा शुरू कर दिया तो एएनएम ने देखा और गंभीर बताते हुए आनन फानन उसे सीएचसी सिरौलीगौसपुर रेफर कर दिया। परिवारीजन प्रसूता को लेकर 9.15 बजे सीएचसी पहुंचे जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

मृतका के पति ने एएनएम व ड्यूटी के समय गायब डॉक्टर के खिलाफ इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए शिकायत की है। एएनएम राधिका देवी का कहना है कि प्रसूता टीबी रोग से ग्रसित थी इसके अलावा उसमें खून की काफी कमी थी। प्रसव निर्धारित समय से डेढ़ माह पूर्व हो जाने तथा अधिक रक्तश्राव की वजह से उसकी मौत हुई है।                          
  
पति भूपेंद्र वर्मा का कहना है कि चार बजे सुबह उसके पेट में दर्द होने से वह तड़प रही। जिसकी जानकारी कई बार एएनएम को दी गई। सुबह होने व नहाने के बाद आने को कह। इस बीच प्रसूता की बढ़ती दर्द के साथ ही शरीर ठंडा पड़ने से वह पल पल तड़पती रही, लेकिन एएनएम का दिल नहीं पसीजा। हंगामा करने पर 9 बजे एएनएम आई और इलाज करने के बाद उसे रेफर कर दिया। 4 से 9 बजे तक इन छह घंटों में प्रसूता का इलाज हो जाता तो उसकी जान बच सकती थी।                          
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