मल्टी सेक्टोरियल डेवलपमेंट प्लान के तहत अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों में शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए माध्यमिक स्तर तक नए कॉलेज खोले जा रहे हैं। इस योजना के तहत जनपद में पांच नए कॉलेज खोले जाने हैं। इनमें एक कॉलेज निर्माणाधीन है।
चार अन्य कॉलेेजों का चयन वित्तीय वर्ष 2016-17 में किया गया है। योजना के तहत चार कॉलेज पहले से ही संचालित हैं। नए कॉलेजों के खुल जाने से इस योजना के कॉलेजों की संख्या 9 हो जाएगी।
अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों में शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए शासन द्वारा ऐसे क्षेत्रों को चिह्नित कर मल्टी सेक्टोरिलय डेवलपमेंट प्लान के तहत माध्यमिक स्तर तक कॉलेज स्थापित किए जाने हैं। इस कॉलेजों में वित्तीय वर्ष 2014-15 में पूरे डलई ब्लॉक के इचौली क्षेत्र में कॉलेज बनाया जाना है।
इसका निर्माण चल रहा है। इसकी लागत 264.98 लाख है। अभी तक इस कॉलेज का आधा निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। शेष निर्माण के लिए कार्यदायी संस्था को धनराशि आवंटित की जा चुकी है। त्तीय वर्ष 2016-17 में चार और कॉलेज इस योजना के तहत चिंहित किए गए हैं।
इसमें विकास खंड मसौली का भयारा, सिरौलीगौसपुर में रामपुर भवानीपुर, फतेहपुर में शाहपुर व पूरे डलई के खेतासराय में यह कॉलेज बनाए जाने हैं। विभाग के लोगों की माने तो केंद्र सरकार द्वारा इन चारों विद्यालयों के निर्माण के लिए धनराशि राज्य को दी जा चुकी है। हालांकि यह राशि अभी कार्यदायी संस्था सीएनडीएस को नहीं मिली है।
पहले से संचालित हैं इस योजना के चार कॉलेज
जनपद में एमएसडीपी के तहत जैदपुर, अहमदपुर, शहाबपुर व बेलहरा में चार कॉलेज पहले से संचालित किए जा रहे हैं। मगर, इन कॉलेजों में संसाधनों का अभाव है। यहां छात्राएं आज भी फर्श पर बिछी टाट पट्टी पर पढ़ाई करने को विवश हैं।
यहां संसाधनों के साथ-साथ शिक्षकों व स्टॉफ की कमी है। इन कॉलेजों में दो या तीन ही शिक्षक हैं। इसके अलावा शिक्षक अभिभावक संघ के तहत शिक्षकों को नियुक्ति कर पठन पाठन कार्य कराया जाता है। विभाग के लोगों की मानें तो इन कॉलेजों में संसाधन अभाव की समस्या हल करने के लिए तत्कालीन जिलाधिकारी विकास गोठलवाल ने शासन को पत्र भी भेजा था। लेकिन परिणाम शून्य रहा।
एमएसडीपी योजना के तहत पांच नए कॉलेज खोले जाने हैं। इचौली में खोले जाने वाले कॉलेज का निर्माण कार्य आधा पूरा भी हो गया है। शेष अन्य कॉलेजों का निर्माण भी जल्द शुरू होगा। निर्माण कार्य की जिम्मेदारी सीएनडीएस को दी गई है। पूर्व में खुले कॉलेजों में शिक्षकों, स्टॉफ व संसाधनों का अभाव है। इन कॉलेजों के छात्राओं का पठन पाठन प्रभावित न हो, इसका पूरा प्रयास किया जाता है। -रामशरण सिंह, जिला विद्यालय निरीक्षक