बाराबंकी। हाल ही में गेहूं खरीद की रफ्तार धीमी हो गई है। सरकारी से बाजार मूल्य लगभग 100 रुपये अधिक होने की वजह से किसान अब क्रय केंद्रों की ओर रुख करने से कतराने लगे हैं। केंद्र प्रभारी भले ही लगातार किसानों के संपर्क में हों लेकिन बढ़ रहे बाजार भाव को देखत हुए किसानों ने या तो गेहूं डंप करना शुरू कर दिया है, या फिर मिलर्स को बेच रहे हैं।
जिले में गेहूं खरीद के लिए 87 क्रय केंद्र खोले गए हैं। इनके माध्यम से अब तक 6500 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद की जा सकी है। इधर तीन-चार दिनों से सरकारी केंद्रों पर गेहूं की आवक न के बराबर हो गई है। विभाग से लेकर केंद्र प्रभारी तक हैरान हैं कि आखिर ऐसा क्या हो गया, जिसकी वजह से अचानक आवक घट गई है। पता चला कि सरकारी मूल्य 2585 रुपये प्रति क्विंटल है जबकि बाजार में यही गेहूं बिना कटौती के 2700 रुपये प्रति क्विंटल की दर से मिलर्स खरीद रहे हैं। यही वजह है कि किसान सरकारी केंद्रों पर गेहूं लेकर नहीं आ रहे हैं।
सरकारी केंद्रों पर है नुकसान
किसान महेश कुमार बताते हैं कि सरकारी केंद्रों पर गेहूं बेचना घाटे का सौदा है, क्योंकि इस बार बेमौसम बारिश की वजह से गेहूं की चमक कम होने के साथ ही दाना पतला हो गया है। यहां पर छन्ना लगाया जाता है, जिससे पतला गेहूं निकल कर बाहर चला जाता है। किसान रामचंद्र वर्मा बताते हैं कि सरकारी केंद्रों पर गेहूं में तमाम प्रकार की कमियां बताई जाती है जबकि व्यापारी बिना किसी कटौती के नकद दाम देकर आसानी से गेहूं खरीद रहे हैं।
जिला खाद्य विपणन अधिकारी राजीव कुलश्रेष्ठ के अनुसार, जिले में गेहूं खरीद के लिए 87 केंद्र खोले गए हैं। सभी केंद्र प्रभारियों को निर्देश हैं कि वह सीधे किसानों से संपर्क कर उन्हें सरकारी केंद्रों पर गेहूं बेचने के लिए प्रेरित करें। इसको लेकर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।