कमजोर मानसून से अब तक मामूली बारिश खेती पर भारी पड़ने लगी है। आसमान में छाए बदरा बरसने के बजाए कई दिनों से लुकाछिपी का खेल खेल रहे हैं। ऐसे में किसानों के चेहरे पर चिंता की लकीरें उभर आई हैं। हालांकि रोजी रोटी का एक मात्र साधन खेती के सहारे ग्रामीण किसी तरह इंजन, नलकूप और नहर के सहारे धान की रोपाई शुरु तो की है किन्तु बारिश न होने के कारण अभी तक सिर्फ 15 प्रतिशत धान की रोपाई हो सकी है।
अगर एक सप्ताह यही हाल रहा तो जिले में धान रोपाई का रकबा घट जाएगा। कृषि वैज्ञानिक और उससे जुड़े अधिकारी अभी से ही किसानों को सलाह देने लगे हैं कि कम पानी वाले फसलों की बुुआई करें। इससे साफ है कि इस बार धान की पैदावार घट सकती है।
कमजोर मानसून को लेकर कृषि मंत्रालय ने अलर्ट जारी किया है। ऐसे में किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें साफ देखी जा सकती हैं। अगर एक हफ्ते के अंदर मौसम की बेरुखी में बदलाव न हुआ तो किसानों को सबसे ज्यादा नुकसान धान की फसल में होगा। इससे जहां पैदावार में कमी आएगी। वहीं इंजन आदि से सिंचाई करने पर जेब पर अतिरिक्त बोझ भी पड़ेगा। पिछले सीजन में जहां अब तक 70 प्रतिशत से ज्यादा धान की रोपाई हुई थी। वहीं इस बार अभी तक मात्र 15 प्रतिशत ही रोपाई हो सकी है। यह हाल तब है जब शासन ने इस बार कृषि विभाग को 183.732 हेक्टेयर का लक्ष्य दिया है। जबकि पिछले सीजन यह लक्ष्य 181.604 हेक्टेयर ही था। विभागीय अधिकारियों के अनुसार जिले में अब तक मात्र 7.83 प्रतिशत ही वर्षा हुई है।