मतदाता धीरे-धीरे अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो रहा है। यही कारण है कि विधानसभा और लोकसभा के चुनाव में अब पहले की अपेक्षा काफी वोटिंग होती है। वोटिंग प्रतिशत बढ़ने का एक और प्रमुख कारण यह भी है कि चुनाव आयोग ने मतदाताओं को वोटिंग के प्रति जागरूक करने के लिए स्वीप का गठन करते हुए खूब प्रचार-प्रसार भी कराया। लेकिन सबसे ज्यादा वोटिंग मारपीट के बावजूद पंचायत चुनाव में हुई है।
निर्वाचन कार्यालय की माने तो वर्ष 2007 के विधानसभा चुनाव में 52 प्रतिशत लोगों ने वोट दिया। लेकिन इसके बाद चलाए गए जागरूकता अभियान का असर ये दिखा कि वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में यह वोट प्रतिशत 63 प्रतिशत तक पहुंच गया। इसी प्रकार वर्ष 2009 में लोकसभा के चुनाव में वोट 51 प्रतिशत पडे़ और जब 2014 का लोकसभा चुनाव हुआ तो मतदान प्रतिशत 65 तक पहुंच गया। इनमें युवा मतदाताओं की भागीदारी कितनी रही, यह बता पाने में निर्वाचन कार्यालय भी असमर्थ है।
लेकिन हाल में मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन के बाद जिले में मतदाताओं की संख्या 24 हजार के आसपास बढ़ी है। वहीं युवा मतदाताओं की संख्या करीब डेढ़ लाख के आसपास पहुंच गई है। जिले में कुल मतदाताओं की संख्या 21 लाख 69 हजार 994 है। इनमें पुरुष मतदाताओं की संख्या 11 लाख 64 हजार 351 और महिला मतदाताओं की संख्या 10 लाख 5 हजार 581 है। मतदाता सूची संशोधन को लेकर चलाए गए अभियान के बाद अब जिले में इतने मतदाता हो गए हैं। इनको अपने अधिकारों के प्रति जागरुक करने का जिम्मा एक बार आयोग ने स्वीप को सौंपा है।