किसी का जॉबकार्ड सालों से संदूक में बंद है तो किसी का प्रधान जी के यहां रखा है। जिले में मनरेगा में भ्रष्टाचार के कई मामले भी सामने आ चुके हैं। अब इसी को लेकर 3.20 लाख जॉबकार्ड धारकों का सत्यापन होगा। शासन से निर्देश मिलने के बाद विभाग इसकी तैयारियों में जुट गया है।
ब्लॉकवार होने वाले सत्यापन कार्य में कई अन्य विभागों के कर्मचारियों को लगाया जाएगा। अपात्रों को सूची से बाहर करने के साथ यह भी पता लगेगा कि मजदूरों को सौ दिन का रोजगार उनके गांव में मिल रहा है कि नहीं।
जिले के पंद्रह ब्लॉकों में कुल 3 लाख 19 हजार 69 जॉबकार्ड धारक हैं। इनमें से 2 लाख 52 हजार 421 मजदूर ऐसे हैं जो पूरी तरह से सक्रिय होकर अपने गांव में रोजगार की मांग कर रहे हैं। इन्हें विभाग तालाब, स्कूल, खड़ंजा समेत कई अन्य निर्माण कार्यों से जोड़कर निर्धारित दर पर मजदूरी दे रहा है। अब सरकार ने जॉबकार्ड धारकों का सत्यापन कराने की योजना बनाई है। इसे लेकर ब्लॉकवार सत्यापन कराने की रूपरेखा तैयार की जा रही है।
सत्यापन कार्य में कई अन्य विभागों के कर्मचारियों को लगाने की भी तैयारी है। सत्यापन के दौरान लंबे समय से गायब श्रमिकों, सौ दिन का रोजगार मिलने आदि की जांच के साथ प्रधान व सचिव के पास श्रमिकों का जॉबकार्ड रखे जाने जैसी शिकायतों की भी पोल खुलेगी। इसके अलावा नए जरूरतमंदों के जॉबकार्ड बनाने की भी बात कही जा रही है।
सीडीओ एकता सिंह का कहना है कि मनरेगा से जुड़े सभी जॉबकार्ड धारकों का सत्यापन होना है। इसके लिए जल्द ही बैठक कर संबंधितों को निर्देशित किया जाएगा। इससे यह भी पता लगेगा कि गांवों में मजदूरों को रोजगार मिल रहा है कि नहीं।