बाराबंकी। पालतू मवेशियों को खुरपका और मुंहपका जैसी जानलेवा बीमारियों से बचाने के लिए आई वैक्सीन मानक पर खरी नहीं उतरी है। पहली अक्तूबर से 31 नवंबर 2020 के बीच के लिए चलाया गया टीकाकरण अभियान बीच में ही रोक दिया गया। हालांकि तब तक 4.90 लाख पालतू मवेशियों का टीकाकरण हो चुका था। पशुपालन विभाग को नई वैक्सीन उपलब्ध कराने के निर्देश के साथ पुराने स्टॉक को वापस किया जा चुका है। शासन ने विभाग को आठ लाख 33 हजार चिह्नित पालतू मवेशियों के टीकाकरण का लक्ष्य दिया था।
हर साल खुरपका और मुंहपका जैसी जानलेवा बीमारी के चलते पालतू पशुओं (गाय और भैंस) की मौत हो जाती है। इससे पशुपालकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। इस पर प्रत्येक वर्ष पशुपालन विभाग अभियान चलाकर चिह्नित पशुओं का टीकाकरण कराता है। पहली अक्तूबर से 31 नवंबर के बीच के लिए चलाया गया टीकाकरण अभियान बीच में ही रोक दिया गया।
बताया जा रहा है कि हैदराबाद से आई वैक्सीन मानक पर खरी नहीं उतरी है। हालांकि तब तक प्रशिक्षित वैक्सीनेटरों द्वारा चार लाख 90 हजार 721 पालतू पशुओं का टीकाकरण किया जा चुका था। इस अभियान में आठ लाख 33 हजार पशुओं को टीका लगाया जाना था। इनमें करीब पांच लाख से अधिक भैंस और तीन लाख के आसपास गाय शामिल हैं।
मानक पर खरी न उतरने वाली वैक्सीन को वापस करने के साथ जनवरी में नई वैक्सीन उपलब्ध कराने की बात कही जा रही है लेकिन अभी तक विभाग को इस वैक्सीन की खेप नहीं मिली है। जबकि पहले की वैक्सीन को वापस भेजने का दावा किया जा रहा है।
विभाग इस असमंजस में है कि जिन मवेशियों का टीकाकरण हो चुका है, उन्हें अब इस नई वैक्सीन की डोज दी जाएगी या नहीं, इस पर तस्वीर स्पष्ट नहीं है। हालांकि बाकी 3 लाख 42 हजार 829 मवेशियों का अभी टीकाकरण होना है। अधिकारी निदेशालय से मिलने वाले निर्देशों के इंतजार में हैं।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. मार्कंडेय ने बताया कि टीकाकरण अभियान में 4.90 लाख पालतू मवेशियों को ही टीके लगाए जा सके हैं। अभियान बीच में ही रोकने के निर्देश मिले थे। बताया गया है कि वैक्सीन मानक पर सही नहीं हैं। नई वैक्सीन जनवरी तक आने की संभावना थी पर नहीं आई।