बाराबंकी। पशुओं को जानलेवा बीमारियों से बचाने का सरकारी अभियान कागजों में दौड़ रहा है। कहीं टीमें समय पर नहीं पहुंचीं तो कहीं वैक्सीन ही खत्म हो गई। कई जगह एक ही दिन में दर्जनों गांवों में टीकाकरण दिखाकर सिर्फ रजिस्टर भर दिए गए। पशुपालक टकटकी लगाए देखते रहे और टीम बिना सूचना दिए टीकाकरण की रस्म अदायगी पूरी कर गांव से निकल गई। इसके चलते पशुपालकों को काफी परेशानी उठाना पड़ रही है।
जिले में 47,094 पशुपालकों और 106 गो-आश्रय स्थलों के कुल 5,72,650 मवेशियों को टीकाकरण का लक्ष्य तय किया गया है। जिले में 22 जुलाई को शुरू हुए टीकाकरण अभियान के तहत विभागीय स्तर पर अब तक 1,36,800 पशुओं के टीकाकरण का दावा किया जा रहा है। इस काम में 37 टीमों को लगाया गया है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. विनोद कुमार यादव ने बताया कि जिले में टीकाकरण अभियान तेजी से चलाया जा रहा है। लक्ष्य के सापेक्ष अब तक 1,36,800 पशुओं को टीका लग चुका है। जहां से भी शिकायतें आ रही हैं, वहां टीमों को पुन: टीकाकरण के लिए भेजने का निर्देश भी दिया गया है।
टीकाकरण की सूचना तक नहीं दी गई
दरियाबाद ब्लॉक के खजूरी गांव के पशुपालक बुद्धिमान सिंह ने बताया कि तीन साल की बात करें तो गांव में टीकाकरण टीम कब आई और कब चली गई, किसी को पता ही नहीं चला। पंचायत भवन पर कोई मुनादी नहीं कराई गई। कागजों में गांव कवर दिखा दिया गया लेकिन घर के दरवाजे पर कोई नहीं आया।
वैक्सीन खत्म होने का बहाना
तहसील सिरौलीगौसपुर के इटोरा गांव निवासी पशुपालक रामहेत गुप्ता ने बताया कि टीम आई जरूर, लेकिन चार-पांच मवेशियों को टीका लगाने के बाद वैक्सीन खत्म होने की बात कह कर अगले दिन आने का वादा करके चले गए। अब निजी डॉक्टर से इलाज कराना पड़ रहा है। गांव में मवेशियों का इलाज और टीकाकरण निजी चिकित्सक ही करते है।
टीम ने की सिर्फ रस्म अदायगी
त्रिवेदीगंज ब्लॉक के लक्ष्मनपुर और लदईपुरवा के पशुपालक राजू , जीतू, सत्येंद्र और दिनेश ने बताया कि सभी के पास तीन से चार मवेशी हैं। पशु चिकित्सालय से टीमों को एक दिन में पांच से छह गांवों में टीकाकरण का लक्ष्य दिया जाता है। इतने कम समय में सभी पशुओं को टीका लगना मुमकिन नहीं है। ऐसे में टीम केवल रजिस्टर पर हस्ताक्षर कराकर
बीमारी फैलने के बाद पहुंची टीम
हैदरगढ़ के कबूलपुर निवासी पशुपालक आजाद कुमार ने बताया कि जब गांव में कई पशुओं को बुखार और मुंह में घाव हो गए, तब अधिकारियों को फोन किया गया। इसके बाद टीम गांव पहुंची। समय पर टीका लग जाता तो इतना नुकसान न होता। गांव में एक साल से मवेशियों को कोई टीका नहीं लगा। यह हाल तब है जब राजकीय पशु चिकित्सालय गांव में ही है।
मुख्य रास्तों तक सीमित रहा अभियान
सिद्वौर ब्लॉक के टेंडवा निवासी रमाशंकर पांडेय ने बताया कि टीम केवल मुख्य सड़क के किनारे वाले घरों में टीका लगाकर लौट जाती है। अंदरूनी मजरों तक कोई नहीं पहुंचता। अधिकारी केवल कागजी रिपोर्ट देखकर सब ठीक मान लेते हैं।