सफेदाबाद/सतरिख (बाराबंकी)। थाना क्षेत्र सतरिख के संदौली गांव में शुक्रवार दोपहर आयोजित गोदभराई के कार्यक्रम से अपने घर लौट रहीं तीन व पांच साल की दो सगी बहनें गोरखपुर एक्सप्रेस की चपेट में आ गईं। दर्दनाक हादसे में दोनों मासूमों की मौत हो गई। बच्चियों के पीछे आ रहे पिता के सामने ही हादसा हुआ। दोनों की मौत से दंपती निसंतान हो गए।
सतरिख थाना क्षेत्र के संदौली गांव निवासी मोहन प्रजापति का घर लखनऊ-बाराबंकी रेलवे लाइन से 50 मीटर की दूरी पर है। रेलवे लाइन की दूसरी तरफ सौ मीटर की दूरी पर मोहन के दादा रामसेवक का मकान है। शुक्रवार को रामसेवक की पुत्री की गोदभराई का कार्यक्रम था जिसमें मोहन अपनी बेटी कीर्ति (3) व जाह्नवी (5) के साथ गए थे।
परिजनों ने बताया कि दोपहर करीब साढ़े 12 बजे दोनों बच्चियां बिना किसी को बताए वापस घर जा रही थीं। पिता मोहन ने यह देखा तो वह भी पीछे चल दिए। जब तक मोहन उनके पास पहुंचते, बच्चियां रेलवे लाइन पार करने लगीं।
ठीक उसी समय लखनऊ की तरफ से गोरखपुर एक्सप्रेस धड़धड़ाते हुए आई और दोनों मासूम बच्चियां उसकी चपेट में आ गईं। कीर्ति ने मौके पर ही दम ताेड़ दिया जबकि जाह्नवी को मोहन व अन्य परिजन अस्पताल लेकर भागे मगर रास्ते में ही उसकी भी मौत हो गई।
हादसे के बाद ट्रेन कुछ देर के लिए खड़ी रही। दर्दनाक हादसे से संदौली गांव में कोहराम मच गया। सैकड़ों ग्रामीण बच्चियों के घर पहुंच गए। मौके पर पहुंचे सतरिख थानाध्यक्ष अमर कुमार चौरसिया ने बिलख रहे परिजनों को ढांढ़स बंधाया।
एक पुत्री की दिमागी बुखार से हो चुकी है मौत
संदौली गांव निवासी मोहन व उनकी पत्नी रीना पर दुखों की पहाड़ टूट पड़ा है। साल भर पहले तक उनकी तीन पुत्रियों से घर गुलजार रहता था। कुछ महीने पहले आठ साल की अनुष्का की दिमागी बुखार के चलते मौत हो गई थी। कीर्ति व जाह्नवी ही दंपती का सहारा थीं। इन दोनों की मौत से रीना व मोहन निसंतान हो गए। दंपती चीख मारकर बार-बार बेहोश हो रहे थे।
पहले भी इसी जगह हो चुका था हादसा
लगभग एक वर्ष पहले संदौली गांव के रहने वाले मुन्ना यादव के 10 वर्षीय पुत्र की भी ट्रेन की चपेट में आ जाने से इसी जगह पर मौत हो गई थी। तब वह खेलते-खेलते रेलवे ट्रैक पर पहुंच गया था।