बाराबंकी। जैदपुर थाना क्षेत्र के बरौली मलिक स्थित बैंक ऑफ इंडिया में करोड़ों रुपये के ऋण घोटाले में पुलिस ने दो और लोगों को गिरफ्तार किया है। इसी के साथ लखनऊ की बैंकों में इस घोटाले की आंच आने लगी है। सूत्रों के अनुसार यहां की बैंकों में भी घोटाला हुआ। पूछताछ में पता चला कि इस गिरोह द्वारा अलग-अलग खातों तथा शाखाओं का इस्तेमाल किया गया। इस घोटाले में बैंक कर्मचारियों के एक नेता के शामिल होने का सुराग भी लगा है। इस मामले में बैंक मैनेजर समेत तीन लोग पहले से जेल में हैं।
जैदपुर क्षेत्र के बरौली मलिक स्थित बैंक ऑफ इंडिया में कई लोगों के नाम से करोड़ों का ऋण निकालने वाले बैंक मैनेजर अमन वर्मा, शैलेंद्र प्रताप पंकज व लखनऊ निवासी मास्टरमाइंड सुरेश रावत को पुलिस नौ अक्तूबर को जेल भेज चुकी है। पुलिस के अनुसार इस मामले में फरार लोनीकटरा थाना क्षेत्र के बीरमखेड़ा गांव निवासी राजेश रावत व लखनऊ के कन्दरपुर थाना गुडंबा निवासी अमित यादव को बृहस्पतिवार को हरख चौराहे के पास से गिरफ्तार किया गया। राजेश पर छह केस दर्ज हैं। इनके पास से ड्राइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड व बाइक बरामद हुई।
राजेश व अमित कम पढ़े-लिखे लोगों को योजनाओं व नौकरी दिलाने के नाम पर वेतन के लिए बरौली मलिक की बैंक में खाते खुलवाते थे। एसपी दिनेश कुमार सिंह ने बताया कि बैंक ऑफ इंडिया, पंजाब एंड सिंध बैंक व बैंक ऑफ बड़ौदा के अलग-अलग खातों तथा शाखाओं का इस्तेमाल किया है। इन बैंकों को पत्र लिखा जा रहा है। पूछताछ में कई घटनाओं का संबंध लखनऊ से होना पाया गया है।
सादे स्टांप पर करवाते थे हस्ताक्षर
पुलिस ने बताया कि जिनके नाम से ऋण निकालना होता था उन लोगों से सादे स्टांप, विदड्राल फार्म, आधार कार्ड, केवाईसी से संबंधित फार्म, आवेदन पत्र पर व सादे कागजों पर हस्ताक्षर बनवा लिए जाते थे। उनका एटीएम व पासबुक अपने पास रख लेते थे। बाद में सुरेश एवं उसके जान पहचान के लोगों के खाते में पैसे भेज दिए जाते थे।