बाराबंकी। योगी सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट के तहत राजधानी के इर्द-गिर्द बसने वाले नए राज्य राजधानी क्षेत्र (एससीआर) को धरातल पर उतारने की कवायद तेज हो गई है। शासन ने निर्माण की विशेषज्ञ कंपनी एई कॉम इंडिया प्राइवेट लिमिटेड व गुरुग्राम की इंजीनियर सलाहकार कंपनी ईजिस इंडिया कंसल्टिंग कंपनी इंजीनियर को एससीआर का रोडमैप व प्लान तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी है। यह दोनों कंपनियां नौ माह के अंदर यह कार्य पूरा करेंगी। इसके आधार पर ही सरकार कार्ययोजना को अमल में लाने के लिए बजट आवंटित करेगी।
दिल्ली एनसीआर की तर्ज पर सीएम योगी के निर्देशन में लखनऊ, हरदोई, सीतापुर, उन्नाव, रायबरेली व बाराबंकी के इलाकों को मिलाकर एससीआर क्षेत्र बनवाने की कवायद चल रही है। कैबिनेट की बैठक में इस पर मुहर लगने के बाद आपत्तियां भी मांगी जा चुकी है। इसके बाद 19 जुलाई 2024 को आवास आवास एवं शहरी नियोजन विभाग ने एससीआर की अधिूसचना जारी की। इसके तहत छह जिलों को मिलाकर 27826 वर्ग किमी क्षेत्रफल एससीआर में शामिल होगा। इसके लिए सीएम की अध्यक्षता में गठित कमेटी में बाराबंकी के डीएम को भी पदेन सदस्य के बतौर शामिल हैं। प्रस्तावित एसीआर में बाराबंकी जिले का पूरा हिस्से आएगा। इंजीनियर विपिन वर्मा ने बताया कि एससीआर के लिए दो कंपनियों को भी नामित कर दिया गया है। इसके बाद अब जल्दी एससीआर को धरातल पर लाने का कार्य शुरू हो सकेगा। (संवाद)
रूदौली को छोड़ शामिल होगा 3892 किमी. क्षेत्रफल
19 जुलाई 2024 को आवास एवं शहरी नियोजन विभाग ने एससीआर की अधिूसचना जारी की थी। इसमें बाराबंकी जिले के 4402 वर्ग किमी क्षेत्रफल को शामिल किया गया था। अधिसूचना में अयोध्या की रुदौली तहसील को भी बाराबंकी के हिस्से में जोड़ दिया गया था, क्योंकि रुदौली तहसील पहले बाराबंकी का ही हिस्सा थी। इस विसंगति को हटाते हुए जिला प्रशासन ने शासन को सुधार लाने की रिपोर्ट भेजी थी। डीएम शशांक त्रिपाठी ने बताया कि इसके बाद संशोधन कर रुदौली को एससीआर से हटा दिया गया है। अब सिर्फ बाराबंकी का 3892 किमी भू-भाग ही योजना में शामिल होगा।
एससीआर के बाद जिले में बढ़ेगी तमाम सुविधाएं
- मेट्रो ट्रेन, रिंग रोड व मल्टी मॉडल ट्रांजिट हब की संभावना
- आईटी पार्क और शैक्षिक संस्थानों की योजना
- नए निवेश क्षेत्र और किफायती आवास योजनाएं
- यातायात और जल निकासी जैसी मूलभूत संरचनाओं का निर्माण
- अनियोजित प्लाटिंग व कॉलोनियां के निर्माण पर अंकुश