बाराबंकी। लखनऊ से बाराबंकी के बीच रोजाना रात को चार से पांच घंटे तक लगने वाला जाम लाखों रुपयों की बर्बादी तो करा ही रहा है, साथ ही जान पर भारी पड़ रहा है। जल्दी निकलने के चक्कर में वाहन गलत साइड से गुजर रहे हैं और दुर्घटनाएं हो रही हैं। बाराबंकी व पूर्वांचल की ओर से आने वाली एंबुलेंस भी जाम में फंसी रहती हैं। हैरत की बात यह है कि इसे लेकर दोनों जिलों के प्रशासन ने कोई उपाय नहीं निकाला है।
राष्ट्रीय राजमार्ग पर बाराबंकी से लखनऊ के बीच 24 घंटे में करीब 40 हजार वाहनों का आवागमन होता है। लखनऊ में भारी वाहनों का रात 11 बजे तक प्रवेश वर्जित रहता है। किसान पथ के पहले ही पुलिस वाहनों को रोकती है। इस कारण गोयल कॉलेज के पास से सफेदाबाद तक ट्रकों की कतार नजर आती है। इस दौरान हाईवे के दोनों ओर बनी सर्विस लेन पर भी ट्रकों व भारी वाहनों की पार्किंग हो जाती है।
11 बजे नो इंट्री खुलने के समय तक इतना भीषण जाम लगता है कि बाराबंकी से गंभीर मरीजों को केजीएमयू, लोहिया, बलरामपुर व सिविल अस्पताल को ले जाने वाली एंबुलेंस तक फंसी रहती हैं। कार व बाइक सवारों को रुकना पड़ता है। इसी दौरान अवैध कट से वाहन किसान पथ पर पहुंचकर माती तक गलत साइड में चलते हैं। इसी कारण आए दिन हादसे हो रहे हैं। दोनों जिलों की सीमा पर रात करीब एक बजे तक भीषण जाम के हालात में यातायात रेंगता रहता है। आपात हालात में लखनऊ पहुंचना मुश्किल हो जाता है। सीओ यातायात आलोक कुमार पाठक कहते हें कि उनकी तैनाती अभी जल्द ही हुई है। समस्याओं को संज्ञान में लेकर उच्चाधिकारियों तक रखा जाएगा।
इंदिरानहर पर ट्रक रोके जाने से आ रही समस्या
लखनऊ-अयोध्या हाईवे पर इंदिरानहर पुल पर यातायात पुलिस कर्मियों द्वारा सीतापुर की ओर जाने वाले ट्रकों को पुल के आगे नहीं जाने दिया जाता है। ऐसे में ट्रक या तो गलत दिशा में चलते हैं या उनकी कतार लग जाती है। इस समस्या के निदान के लिए डीएम व एसपी ने लखनऊ के अफसरों को पत्र भी लिखा और एनएचएआई को अवैध कट बंद करने निर्देश दिए थे। साथ ही किसान पथ की सर्विस लेन से अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए थे, लेकिन फिर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई।