कोटवाधाम (बाराबंकी)। तीनों बैराजों से सरयू नदी में करीब पौने तीन लाख क्यूसेक पानी और छोड़ा गया है। इससे बाढ़ पीड़ितों की समस्याएं और बढ़ेंगी, साथ ही तराई के हालात और ज्यादा बिगडेंगे, इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है। इससे पहले भी कई बार पानी छोड़ने से तराई के करीब चार दर्जन गांव बाढ़ की चपेट में आ गए थे और अभी भी एक दर्जन से ज्यादा गांव बाढ़ की चपेट में हैं।
सिरौलीगौसपुर तहसील क्षेत्र में नदी का जलस्तर सोमवार से फिर बढ़ने लगा है, जिसका असर दिखाई पड़ने लगा है। इससे नदी के किनारे बसे गांव गोबरहा, कहारनपुरवा, सनावा, बघौली का पुरवा, टेपरा, सराय सुरजन, भैरवकोल, नव्वनपुरवा, मांझारायपुर, बीहड, बबुरी, सिरौलीगुंग, कोठीडीहा फिर बाढ़ की चपेट में आ सकते हैं। अभी तेलवारी, इटहुआ पूर्व, करोनी, रेता तथा सूरतगंज का फाजिलपुर, परशुराम पुरवा आदि गांव बाढ़ के पानी से घिरे हुए हैं। यहां के पीड़ित तटबंध या फिर सुरक्षित स्थानों पर शरण लिए हुए हैं।
इटाहुआ पूर्व गांव तो नदी में समा चुका है, अब खेती योग्य जमीन भी नदी की धारा में समाती जा रही है। सोमवार को करीब 15 बीघा जमीन नदी में समा गई। उधर, सूरतगंज के हेतमापुर क्षेत्र में फिर से स्थिति बिगड़ने के आसार है। बतनेरा, सरसंडा, बलईपुर, सुंदरनगर, ललपुरवा, फाजिलपुर, जमका, परशरामपुर गांवों के फिर हालात बिगड़ेंगे, इससे बाढ़ पीड़ितों में दहशत है। एसडीएम सिरौलीगौसपुर विश्वमित्र सिंह ने बताया कि बैराजों से पानी छोड़े जाने के बाद सरयू नदी का जलस्तर फिर से बढ़ने लगा है। इससे देखते हुए राजस्व कर्मियों को पूरी तरह से मुस्तैद रहने के निर्देश दिए गए हैं। बाढ़ पीड़ितों को यथासंभव मदद का प्रयास जारी है।
नहीं मिला राशन, पन्नी और तिरपाल
नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद गांव से पलायन कर सुरक्षित स्थान पर आए बाढ़ पीड़ितों की समस्याएं कम नहीं हुई हैं। टेपरा गांव को जाने वाली सड़क पर गुजर-बसर कर रहे करीब 10 परिवारों के सामने रोजी रोटी का संकट है। अपने परिवार संग रह रहीं बड़का ने बताया कि करीब 10 दिन से यहीं पर हैं। मगर अभी तक कोई हाल तक जानने नहीं आया है। वहीं इनके साथ रुकीं अवतारा कहती हैं कि हर बार बहिया से पहिले सब कुछ मिल जात रहय, मगर ई बार अभिन तक कुछ नहीं मिला है। भोजन, राशन, तिरपाल, पन्नी, मच्छरदानी, टार्च कुछ नहीं मिला है। ऐसे में हम लोगों का जीवन कैसे गुजर रहा है, यह हम ही जानते हैं।