बाराबंकी। हत्या कर शव गायब करने के चर्चित मामले में अपर सत्र न्यायाधीश असद अहमद हाशमी की अदालत ने पत्नी समेत तीन आरोपियों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषियों रेनू उर्फ राधारानी, विनोद शर्मा उर्फ पंडित और प्रदीप कुमार लोनिया उर्फ चंद्रमौली पर 25-25 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। अदालत के इस फैसले से सात वर्ष पुराने मामले का पटाक्षेप हो गया।
अभियोजन पक्ष के अनुसार जैदपुर थाना क्षेत्र के छुलिहा पुरवा मजरे इचौलिया निवासी चंद्रेश कुमार वर्मा ने तीन अप्रैल 2019 को अपने भाई अरुण कुमार के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया था कि अरुण 22 मार्च 2019 को घर से निकले थे और वापस नहीं लौटे। बाद में 26 मार्च को अरुण की पत्नी रेनू उर्फ राधारानी ने भी उनके गुमशुदा होने की सूचना पुलिस को दी थी।
जांच के दौरान सामने आया कि 22 मार्च की दोपहर अरुण कुमार ने बलछठ गांव निवासी विनोद शर्मा उर्फ पंडित के घर पर प्रदीप कुमार लोनिया उर्फ चंद्रमौली के साथ शराब पी थी। इसके बाद वह दोनों के साथ अपने घर पहुंचे थे। आरोप था कि रात में अरुण को अचेत अवस्था में विनोद और प्रदीप कहीं लेकर चले गए थे।
मृतक के भाई चंद्रेश ने पुलिस को दी गई तहरीर में आरोप लगाया था कि उसकी भाभी रेनू के प्रदीप से अवैध संबंध थे और इसी वजह से तीनों ने मिलकर अरुण की हत्या कर दी।पुलिस ने मामले की विवेचना के दौरान आरोपियों की निशानदेही पर गोमती नदी के किनारे से अरुण का नरमुंड, कपड़े, मोबाइल फोन, घटना में प्रयुक्त बाइक, शराब की शीशी और गिलास बरामद किए थे।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सिर पर गंभीर चोट लगने से मौत की पुष्टि हुई थी। वहीं डीएनए जांच से बरामद नरमुंड की पहचान अरुण कुमार के रूप में हुई थी।
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कई गवाहों और वैज्ञानिक साक्ष्यों को अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया। गवाहों के बयान, बरामदगी, डीएनए रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने तीनों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद और अर्थदंड की सजा सुनाई।