देश आज अपना 67वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। देश की आजादी के लिए न जाने कितनों ने अपनी जान कुर्बान कर दी। उन्हें आज हम श्रद्धा से नमन भी करते हैं। आजादी हासिल करना जैसी कठिन चुनौती थी उससे कम चुनौती लोकतंत्र को सहेजने की भी नहीं है। जाति, क्षेत्र, भाषा और वर्ग से ऊपर उठकर देश और समाज के बारे में सोचने और सेवा करने वाले सच्चे अर्थों में आज के दौर में लोकतंत्र के सजग प्रहरी हैं।
तिरंगे में रंग दिया पूरा गांव
विकास खंड फतेहपुर की ग्राम पंचायत बसारा के दो सगे भाई राहुल खान व रेहान ने अपने गांव की तस्वीर ही बदल दी है। देवा से फतेहपुर व फतेहपुर से देवा की ओन जाने लगेंगे, रास्ते में बसारा गांव अपनी मनमोहक छटा बिखेरता दिखेगा। बसारा ग्राम पंचायत मेें 9 मजरों की कुल आबादी 4846 है। पर्यावरण संरक्षण को लेकर काम भी यहां जमीनी स्तर पर दिखता है। राहुल खान की चाहत प्रधानमंत्री से मिलकर गांव को मॉडल गांव बनाने के साथ गांव को स्वच्छता के साथ शैक्षिक, तकनीकी और विज्ञान की दिशा में आगे ले जाने की है।
सेवा की अनूठी मिसाल संत रामज्ञान दास
श्रीराम वन कुटीर हड़ियाकोल की देखरेख कर रहे संत रामज्ञान दास जी महराज 73 वर्ष की आयुु पूरी करने के बाद भी समाज सेवा के प्रति उनका जुनून कम नहीं हुआ है। श्रीराम वनकुटीर आश्रम हड़ियाकोल में स्वामी रामज्ञान दास के सानिध्य मेें सेवाभाव का जो नजारा दिखता है वह शायद किसी अन्य आयोजन में संभव नहीं है। लोगों को निरोग करने के लिए 36 वर्षों से विशेष चिकित्सा शिविर हर साल लगवाकर लोगों की सेवा कर रहे हैं। अमेरिका, रूस, नेपाल समेत कई देशों से चिकित्सक सेवादान करते हैं। हजारों मरीजों की सेवा कर पुण्य कमाने की इच्छा से आने वाले सेवादारों की शिद्दत व दूर दराज से आए डॉक्टरों की आंखों को रोशन करने की इच्छा ने इस ऑपरेशन शिविर नहीं सेवा आश्रम का महाकुंभ सरीखा बना दिया है।
अमरनाथ में लगाते मेडिकल कैंप
जिले के कैलाश नाथ शर्मा की समाज सेवा में अलग ही पहचान है। एक बार अमरनाथ यात्रा गए तो यात्रियों की दुस्वारियां देखीं, फिर क्या था इन्होंने बर्फानीश्वर सेवा समिति बनाई और लोगों को जोड़ा। समाज से अर्थिक मदद चंदे के रूप में ली। आज इस समिति में प्रदेश के दर्जन भर से अधिक जिलों के लोग जुड़े हैं। अमर नाथ यात्रा के दौरान श्री शर्मा की अगुवाई में समिति एम्बुलेंस और सेवादारों के साथ जम्मू कश्मीर के अमरनाथ में 13,500 फीट की ऊंचाई पर लंगर व चिकित्सा कैंप चलाती है। जहां लोगों की निशुल्क सेवा होती है। यहां जिले में गरीब व असहाय लड़कियों की शादी में मदद करना, ठंडी में अलाव व गर्मियों में प्याऊ की व्यवस्था करते हैं। सेवा कार्य के लिए जम्मू-कश्मीर की सेना इन्हें दो बार सम्मानित भी कर चुकी है।