बाराबंकी। जिला हमेशा से मादक पदार्थों की तस्करी के लिए कुख्यात रहा है। खासकर जैदपुर थाना क्षेत्र का टिकरा गांव तो मिनी दुबई के नाम से जाना जाने लगा था। पिछले दो सालों में तस्करी का यह नेटवर्क तोड़ने के लिए पुलिस ने बड़ी कार्रवाई, लेकिन खास लगाम नहीं लग पाई। तस्करों का नेटवर्क पूरे देश में फैला है। इसी वजह से सरकार ने पिछले साल जिले में ही नारकोटिक्स थाना खोल दिया।
दरअसल, क्रूड व रसायन से फाइन मार्फीन बनाने वाले खास कारीगर बाराबंकी में मौजूद हैं। इनकी मांग बिहार, पश्चिम बंगाल, राजस्थान व हरियाणा प्रांत के तस्कर भी करते हैं। नारकोटिक्स थाने की पुलिस को इस बारे में सुराग मिले हैं। यहां से मार्फीन व अन्य मादक पदार्थों की सप्लाई का भी मजबूत नेटवर्क है। दो महीने पहले जैदपुर के टिकरा मुर्तजा गांव निवासी तस्कर शनाउल्ला के घर पर छापा मारकर पुलिस ने चार लोगों को गिरफ्तार कर 23.10 किलो स्मैक बरामद की थी। यह अब तक की सबसे बड़ी बरामदगी मानी जा रही है। पूछताछ में पता चला था कि टिकरा मुर्तजा गांव के अलीम साधु, मारूफ और मो. कैफ करीब 15 वर्षों से आसपास के जनपदों समेत अन्य प्रांतों और पड़ोसी देश नेपाल में तस्करी कर रहे थे। अब भी बाहरी प्रांतों और प्रदेश के अन्य जिलों में मादक पदार्थों की गिरफ्तारी होने पर बाराबंकी के तस्करों का नाम सामने आता है। संवाद