बाराबंकी। जिम्मेदारों की उदासीनता के चलते बिजली बिलों में गड़बड़ी थमने का नाम नहीं ले रही। मनमानी राशि के बिजली बिल बनाकर भेजे जा रहे हैं। इसके चलते बिजली बिल में संशोधन कराने के लिए उपभोक्ताओं को एक से दूसरे पटल तक की दौड़ लगाकर परेशान होना पड़ रहा है।
बीते दिनों हैदरगढ़ में डीएम के निरीक्षण के दौरान एक उपभोक्ता ने शिकायत की थी कि बिजली का बिल दो लाख रुपये आ गया। कई बार कार्यालय की दौड़ लगाने के बाद भी बिल अभी तक संशोधित नहीं हो सका। कमोबेश ऐसे कई मामले हैं, जिनमें उपभोक्ता बिजली बिल संशोधित कराने के लिए कार्यालय के चक्कर लगाने की परेशानी उठा रहे हैं। पटल पर मौजूद कर्मचारी अगले माह तक बिल ठीक कराने की बात कह उन्हें टरका देते हैं।
अधीक्षण अभियंता पॉवर कार्पोरेशन की अधीक्षण अभियंता राजबाला ने बताया कि बिल संशोधन की जो भी शिकायतें आती हैं उन्हें तुंरत निस्तारित करने के निर्देश दिए गए है। मीटर गड़बड़ी की शिकायत पर चेक मीटर भी लगए जाते हैं। बिजली मीटर रीडिंग की प्रक्रिया को पारदर्शी और सटीक बनाने के लिए ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकॉग्निशन (ओसीआर) सॉफ्टवेयर का प्रयोग किया जा रहा है। इससे रीडिंग में त्रुटि नहीं आती है। जो मीटर रीडर्स ओसीआर प्रयोग नहीं कर रहे हैं ऐसे 23 मीटर रीडर्स के खिलाफ कार्रवाई भी की गई है।
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बिल हर महीने जमा करता हूं लेकिन जनवरी माह से महीने में दो तीन बार बिल आ रहा है। कभी 18 हजार तो कभी नौ हजार। अप्रैल माह में संशोधन के बाद 1800 रुपये जमा कर दिया। इसके बाद 6900 रुपये का बिल आ गया।
- मनोज द्विवेदी, ग्राम पूरे दुर्जन
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हर माह बिल जमा करने के बाद भी 95 हजार रुपये का बिल आ गया है। बिल संशोधित कराने के लिए कई बार कार्यालय गया लेकिन दुरुस्त नहीं हो सका है। कभी इस अधिकारी तो कभी उस अधिकारी के पास भेज देते हैं।
- सतीश कुमार, निवासी अरियामऊ