बाराबंकी। शहर में लेडी सीएमएस बंगले की जमीन पर पांच करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित ऑडिटोरियम के निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। मंडलायुक्त अयोध्या गौरव दयाल ने इसके खिलाफ दाखिल दो अपीलों को सुनवाई के बाद खारिज करते हुए अपना फैसला नगर पालिका परिषद के पक्ष में दिया है।
करीब 20 साल से नगर पालिका लेडी सीएमएस बंगले की जमीन को लेकर कानूनी-दांवपेंच में उलझी थी। डेढ़ साल पहले तत्कालीन डीएम सत्येंद्र कुमार ने इसका संज्ञान लेते हुए जमीन से अतिक्रमण हटवाया था। नगर पालिका ने जमीन को गलत तरीके से बेचने वाले 14 लोगों के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज कराया था। इस मामले में पांच लोग जेल भी भेजे गए।
लखनऊ के बख्शी तालाब तहसील कोर्ट में चल रहे एक राजस्व वाद को भी बेहतर पैरवी कर निस्तारित कराया गया। प्रस्तावित ऑडिटोरियम के निर्माण के लिए शासन से पांच करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत होने के साथ ही इसका मानचित्र भी तैयार हो चुका है। निर्माण की प्रक्रिया शुरू होने पर विपक्षी ने बख्शी तालाब तहसील से खारिज हुए वाद के संबंध में मंडलायुक्त के यहां अपील लंबित होने का हवाला देते हुए निर्माण कार्य पर रोक लगवाने के लिए उच्च न्यायालय में अपील दाखिल कर दी।
इसकी सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने मंडलायुक्त के यहां से अपील का निस्तारण न होने तक ऑडिटोरियम के निर्माण पर रोक लगा दी थी। नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी संजय कुमार शुक्ल ने बताया कि मंडलायुक्त कोर्ट ने विपक्षी सईदा फातिमा अशरफ की तरफ से जमीन पर पेश किए गए दावे संबंधी दोनों अपीलों को सुनवाई बाद खारिज कर दिया है। इससे लेडी सीएमएस के बंगले की जमीन पर ऑडिटोरियम के निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। शीघ्र ही निर्माण संबंधी कार्रवाई शुरू की जाएगी।