घर हो या द्वार सफाई के मामले में महिलाओं से अच्छा शायद ही कोई जानता है। सरकार ने गांव की सफाई करने के लिए सफाई कर्मी भले ही तैनात किए हों लेकिन वास्तव में आज भी गांव वाले ही ज्यादातर सफाई करते हैं, ऐसा ही कुछ सूरतगंज के मीरपुर गांव में देखने को मिला। यहां सफाईकर्मी के न आने से गांव की ही संगीता ने गांव को साफ रखने का बीड़ा उठाया है। एक महिला को नाली साफ करता देख एक के बाद एक इस अभियान से जुड़ गया और कारवां बढ़ता गया।
विकास खंड सूरतगंज की ग्राम पंचायत मीरपुर में सफाई का कार्य करने के लिए राजा व मनोज कुमार की तैनाती की गई है। मनोज कुमार मीरपुर का ही मूल निवासी भी है उसके बाद भी दोनों सफाई कर्मी चार माह से नदारद हैं। जिससे गांव में जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे हुए हैं। गांव में बनी नालियां सफाई के आभाव में चोक पड़ी हैं। जिससे लोगों के घरों से निकलने वाला गंदा पानी रास्ते में बहने से लोगों को निकलने में काफी समस्या का सामना करना पड़ रहा था। गंदगी से पटी पड़ी गलियों से संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ रहा है।
गांव वालों ने कई इस संबंध में खंड विकास अधिकारी सुशांत सिंह से शिकायत की लेेकिन कोई कार्रवाई न होने से सफाई कर्मियों के हौसले काफी बुलंद हैं। सफाई की मांग को लेकर ग्रामीणों ने हर स्तर पर प्रयास किया लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। गांव की संगीता जायसवाल ने सफाई का बीड़ा उठाते हुए रविवार को सफाई अभियान की शुरुआत की। संगीता को सफाई करता देख गांव वाले भी एक के बाद एक करके इस अभियान से जुड़ते गए और पूरा गांव स्वच्छ हो गया। गंाव वालों में आलोक कुमार, विकास, रमेश, शबनम, फातिमा, पप्पू जयसवाल, जगदीश, श्रवण, इरफान, कलीम व अकबरअली आदि ने फावड़ा लेकर नालियाें व रास्तों की सफाई की है।