आखिरकार देववृक्ष पारिजात का उपचार शुरू हुआ। गुरुवार को पहुंचे एनबीआरआई के वैज्ञानिकों ने वृक्ष के खोखले स्थानों की स्प्रे मशीन से धुलाई की और दवाओं का समिश्रण लगाया।
ऐतिहासिक विरासत पारिजात वृक्ष का उपचार न किये जाने से इसका अस्तित्व खतरे में है। अमर उजाला ने बीती 22 जनवरी को ‘अंतिम सांसें गिन रहा है देववृक्ष पारिजात’ शीर्षक से खबर प्रमुखता के साथ प्रकाशित की थी। प्रशासन ने इसे गंभीरता से लेते हुए पारिजात वृक्ष के उपचार के निर्देश दिए थे।
जिस पर राष्ट्रीय वानस्पतिक अनुसंधान केन्द्र लखनऊ की टीम के प्रधान वैज्ञानिक एसके तिवारी, प्रधान तकनीकी अधिकारी डॉ. एसएस. त्रिपाठी आदि ने पारिजात वृक्ष के खोखले स्थानों की स्प्रे मशीन द्वारा धुलाई, दवा का छिड़काव, गुड़ाई और फोर एट थ्रीमेट, मिथाइल ब्रोमाइट के साथ अन्य दवाओं का सम्मिश्रण करके लेप किया।