बाराबंकी। केंद्र सरकार की महात्वाकांक्षी योजना जल जीवन मिशन (ग्रामीण) बाराबंकी के कई गांवों में विभागीय लापरवाही और ठेकेदारों की सुस्ती की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। जिले के हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने का सरकारी दावा धरातल पर दम तोड़ रहा है। विभाग का आंकड़ा कहता है कि जिले के 1595 गांवों में से करीब 750 गांवों में जलापूर्ति शुरू हो चुकी है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों की हकीकत इन दावों से कोसों दूर है। कहीं टंकियां केवल ढांचे के रूप में खड़ी हैं, तो कहीं करोड़ों खर्च होने के बाद भी ग्रामीण पानी को तरस रहे हैं।
करोड़ों का बजट, फिर भी ग्रामीण प्यासे
रामनगर ब्लॉक के भोहरा कला गांव में करीब 3.93 करोड़ रुपये की लागत से परियोजना शुरू की गई थी। लक्ष्य था कि अप्रैल 2024 तक घर-घर पानी पहुंच जाएगा। लेकिन हकीकत यह है कि कस्बे की पुरानी बाजार में बिछाई गई पाइपलाइन एक जुलूस के दौरान काट दी गई थी, जिसे आज तक जोड़ा नहीं गया। ग्रामीण कहते हैं कि केवल एक-दो घरों में टोंटी लगाकर खानापूरी कर दी गई है।
कागजों पर कनेक्शन, जमीन पर सन्नाटा
भ्रष्टाचार और डाटा की बाजीगरी का सबसे बड़ा उदाहरण त्रिवेदीगंज ब्लॉक का अलादादपुर गांव है। सरकारी रिकॉर्ड में यहां 271 कनेक्शन चालू दिखाए गए हैं, लेकिन मौके पर मुश्किल से 10 घरों में पानी पहुंच रहा है। लगभग 1500 की आबादी वाली इस पंचायत के लोग आज भी पुराने हैंडपंपों और कुओं पर निर्भर हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि काम अधूरा छोड़कर ठेकेदार गायब हैं और कोई अधिकारी सुध लेने नहीं आता।
कहीं पिलर खड़े, तो कहीं काम महीनों से बंद
भुनईरूद्र गांव में पिछले तीन साल से पानी की टंकी का निर्माण चल रहा है। यहां केवल पिलर खड़े कर सरिया डाल दी गई है। बोरिंग होने और पाइपलाइन बिछने के बावजूद पिछले डेढ़ साल से एक बूंद पानी की सप्लाई नहीं हुई है। इसी तरह, सिरौलीगौसपुर के बदोसराय में 8220 परिवारों को पानी देने का सपना दिखाकर 4.17 लाख (सांकेतिक बजट) की लागत से काम शुरू हुआ, लेकिन पिछले सात महीनों से निर्माण पूरी तरह ठप है। यहां भी केवल टंकी का ढांचा ही खड़ा हो सका है।
50 हजार की आबादी तीन साल से कर रही इंतजार
सूरतगंज जैसी बड़ी ग्राम पंचायत, जिसकी आबादी करीब 50 हजार है, वहां भी पिछले तीन साल से टंकी अधूरी पड़ी है। यही हाल अमराई गांव का है, जहां वर्ष 2023 में काम पूरा होना था, लेकिन ग्रामीण आज भी शुद्ध पानी के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
ग्रामीणों में बढ़ता आक्रोश
दो से तीन साल का लंबा इंतजार अब ग्रामीणों के सब्र का बांध तोड़ रहा है। लोगों का कहना है कि सड़कों को पाइपलाइन के नाम पर खोदकर छोड़ दिया गया है, जिससे आवागमन में भी दिक्कत हो रही है। विभागीय अधिकारी जहां जल्द काम पूरा होने का रटा-रटाया जवाब दे रहे हैं, वहीं धरातल पर ठेकेदारों की मनमानी और निगरानी की कमी ने इस मिशन को मजाक बना दिया है।
-
कनेक्शनों की संख्या मालूम नहीं
जल निगम के अधिशासी अभियंता अमित कुमार ने बताया कि करीब 750 गांवों में जलापूर्ति शुरू हो चुकी है, जबकि कई गांवों में कार्य प्रगति पर है। समय सीमा में काम पूरा कराने की योजना है। अभी अवकाश पर आया हूं इसलिए कनेक्शनों की संख्या नहीं बता सकता।