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Barabanki News: लखपति दीदी बना रहा टैंक मछली पालन

Thu, 15 Jan 2026 01:50 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
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मछलियों को चारा डालती रामनगर ब्लॉक के डांडियामऊ निवासी विजय लक्ष्मी सिंह।
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बाराबंकी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ''लखपति दीदी'' योजना को पंख लगाते हुए, बाराबंकी जिले में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं टैंकों में मछली पालन के माध्यम से आर्थिक सशक्तीकरण की ओर अग्रसर हैं। बीते साल जिले के विभिन्न स्थानों पर महिलाओं द्वारा शुरू की गई इस अनूठी पहल में अब मछलियों की फसल तैयार हो गई है और अगले पखवाड़े में खरीदारों के आने की उम्मीद है। इससे जहां एक ओर महिलाएं आत्मनिर्भर बनेंगी, वहीं दूसरी ओर उन्हें एक से डेढ़ लाख रुपये तक का सालाना लाभ होने का अनुमान है।
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टैंकों में मछली पालन को न केवल स्थानीय स्तर पर सराहा जा रहा है, बल्कि मुख्य सचिव ने भी मछली पालन के इस नए तरीके का अवलोकन किया था। यह इस बात का प्रमाण है कि कैसे आधुनिक तकनीकें ग्रामीण महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकती हैं। त्रिलोकपुर प्रतिनिधि के अनुसार, रामनगर ब्लॉक के डांडियामऊ निवासी विजय लक्ष्मी सिंह बालाजी स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष हैं। इस समूह का गठन वर्ष 2020 हुआ था। समूह में 10 स्वावलंबी महिलाएं हैं। एमए तक शिक्षित विजय लक्ष्मी सिंह के पति अमित सिंह एक किसान हैं। विजय लक्ष्मी ने समूह से करीब तीन लाख का ऋण लेकर छह महीने पहले बायोफ्लॉक तकनीक से पांच टैंकों में मछली पालन का नवाचार किया। एक टैंक में 10 हजार लीटर पानी में कुल चार हजार मछली के बच्चे डाले गए थे। एक टैंक पर 60 हजार रुपए का खर्च आया। अब मछलियां बड़ी होकर बिकने लायक हो गई हैं। मछली खरीदने वाले व्यापारियों का आर्डर मिला है। एक लाख रुपये प्रति टैंक लाभ होने की उम्मीद है। विजय लक्ष्मी सिंह का कहना है कि टैंक में सिंघी प्रजाति की मछलियां पल रही हैं। अगले पखवारे में अंत में मछली खरीदने व्यापारी आएंगे। मछली बेचने के बाद समूह का कर्ज अदा करेंगी। आमदनी का 50 प्रतिशत हिस्सा समूह की महिलाओं में बंटेगा। इसके बाद टैंक की संख्या बढ़ाई जाएगी, ताकि अगले वर्ष दोगुना लाभ हो सके। सात और टैंक अभी से बना लिए गए हैं।


रामसनेहीघाट प्रतिनिधि के अनुसार, बनीकोडर ब्लॉक के ग्राम राजेपुर की रहने वाली रिजवाना भी इसी राह पर हैं। बाबा ब्रह्मदेव स्वयं सहायता समूह से जुड़कर उन्होंने 60 हजार रुपये का ऋण लिया। अक्टूबर माह में उन्होंने एक टैंक में बंगाल से मंगाए गए चार हजार मछली के बच्चे पाले। उनकी मेहनत भी अब रंग ला रही है। ये महिलाएं न केवल आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं, बल्कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के सपने को भी साकार कर रही हैं। टैंक मछली पालन की यह विधि कम जगह में अधिक उत्पादन देने की क्षमता रखती है और पारंपरिक मछली पालन की तुलना में कम संसाधनों की आवश्यकता होती है।
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निवेश: एक टैंक पर लगभग 60 हजार रुपये का खर्च आया।

वर्तमान स्थिति: मछलियाँ अब बिकने लायक हो गई हैं।
अपेक्षित लाभ: प्रति टैंक एक लाख रुपये का लाभ होने की उम्मीद है।
मछली की प्रजाति: टैंकों में सिंघी प्रजाति की मछलियां पाली जा रही हैं।


निवेश और लाभ का तुलनात्मक विवरण (अनुमानित)



विवरण
निवेश (प्रति टैंक)
अपेक्षित लाभ (प्रति टैंक)
कुल लाभ (5 टैंकों पर)

विजयलक्ष्मी सिंह
₹ 60,000
₹ 1,00,000
₹ 5,00,000 (अनुमानित)

रिजवाना ₹ 60,000
₹ 1,00,000 (अनुमानित)
₹ 1,00,000 (अनुमानित)
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