बाराबंकी। कभी मुख्तार अंसारी गैंग से जुड़े और बीते कुछ वर्षों से वकालत कर रहे शोएब किदवई उर्फ बॉबी (51) को पल्सर सवार दो हेलमेटधारी हमलावरों ने महज एक मिनट में अंधाधुंध गोली चलाकर मौत के घाट उतार दिया। घटना को अंजाम देने के बाद बेखौफ हमलावर मौके से भाग निकले। प्रत्यक्षदर्शियों की माने तो पूरा खूनी खेल महज एक मिनट में खत्म हो गया। इस दौरान हमलावरों की तैयारी, हमले की सटीकता और भागने के तरीके व पेशेवर अंदाज से साफ दिख रहा था कि हमलावर पेशेवर थे। वह या तो सुपारी किलर थे अथवा किसी गिरोह से जुड़े शार्प शूटर हो सकते हैं।
एक प्रत्यक्षदर्शी के अनुसार दोपहर करीब एक बजे बजे शोएब की नीले रंग की बोलेनो कार लखनऊ की ओर से असेनी मोड़ पर बाराबंकी की दिशा में मुड़ने जा रही थी। अचानक सामने जा रहे एक चार पहिया में ब्रेक लगने से शोएब की कार भी रुक गई। इसी दौरान पीछे से आई पल्सर बाइक पर सवार दो हेलमेटधारी कार के पास ठहरे। इसके बाद एक हमलावर ने कार के सामने आकर फायरिंग शुरू कर दी। दूसरा हमलावर भी बाई ओर खड़ा होकर लगातार गोलियां दागता रहा। एक हमलावर ने कार के पिछले दरवाजे के पास पहुंचकर अंधाधुंध फायरिंग की, मानो वह कार में बैठे व्यक्ति की मौत सुनिश्चित करना चाहता हो।
गोलियो की तड़तड़ाहट से हाईवे पर अफरातफरी मच गई। राहगीर इधर-उधर भागने लगे। एक बाइक सवार ने सूझबूझ दिखाते हुए आगे तैनात यातायात पुलिसकर्मी को घटना की सूचना दी। सूचना मिलते ही शहर कोतवाली और अन्य थानों की पुलिस मौके पर पहुंचीी। एसपी अर्पित विजयवर्गीय ने बताया कि पुलिस घटना से जुड़े हर पहलू की जांच कर रही है।
पांच खाली कारतूस, कैमरे से मेमोरी कार्ड गायब
घटना के बाद पुलिस ने अंडरपास के नीचे की सड़क को दोनों ओर से सील कर दिया। क्राइम ब्रांच और फोरेंसिक टीम ने कार के पास से पांच खाली कारतूस बरामद किए। सड़क की मिट्टी और खून के नमूने भी एकत्र किए गए। जांच में पास में लगे एक सीसीटीवी कैमरा चलता तो मिला मगर उसके अंदर मेमोरी कार्ड न मिलने से कुछ पता नहीं चला। पुलिस हाईवे पर लगे टोल प्लाजा और आसपास के निजी प्रतिष्ठानों के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है। ताकि हमलावरों की बाइक का नंबर पहचाना जा सके।
एडीजी भी मौके पर पहुंचे
घटना की जानकारी के बाद लखनऊ जोन के एडीजी प्रवीण कुमार ने भी मौके पर पहुंचकर घटनास्थल का मुआयना किया। उन्होंने एसपी को निर्देश दिया कि संदिग्ध बाइक की पहचान प्राथमिकता पर हो और तकनीकी सर्विलांस का सहारा लिया जाए।
शूटर से अधिवक्ता तक की कहानी
शोएब किदवई बॉबी का नाम पहले मुख्तार अंसारी गिरोह से जुड़ा था। चार फरवरी 1999 में लखनऊ में जेल अधीक्षक आरके तिवारी की हत्या व बाराबंकी के डॉ. डीवी सिंह की हत्या में शोएब किदवई का नाम खुलकर सामने आया था। पुलिस के अनुसार शोएब पर कुल 12 मामले दर्ज हैं। इनमें एक जेल अधीक्षक की हत्या का भी है। हालांकि पिछले करीब 15 साल से वह खुद को आपराधिक दुनिया से दूर कर वकालत के पेशे से जुड़ गए थे। वह लखनऊ हाईकोर्ट और बाराबंकी में प्रैक्टिस कर रहे थे।
बाराबंकी में घर होने के बाद भी ज्यादातर लखनऊ में रहते थे। परिवार में पत्नी साजिया के अलावा 14 साल का पुत्र व एक पुत्री है जो पढ़ रहे हैं। वकीलों का एक वर्ग इसे अधिवक्ता की हत्या भी मान रहा है।
बदले की भावना या अतीत की रंजिश
पुलिस की पांच टीमें इस घटना को लेकर कई बिंदुओं पर काम कर रही हैं। गैंग से जुड़ा अतीत क्या आज भी पीछा कर रहा था अथवा वकालत के दौरान किसी गंभीर मुकदमे में प्रापर्टी आदि के लेनेदेन को लेकर भी घटना को अंजाम देने के कयास लगाए जा रहे हैं। पुलिस इस पहलू की जांच भी कर रही है कि कही यह घटना किसी पुराने हत्याकांड में कोई बदले की भावना का नतीजा तो नहीं है।
.
बिफरे वकील, लगाया जाम
घटना के बाद करीब दो बजे शोएब का शव जिला अस्पताल लाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पोस्टमार्टम हाउस में शव रखे जाने के बाद वकीलों का जमावड़ा लग गया। वकीलों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। आरोप लगाया कि कोई बड़ा अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। करीब एक घंटे बाद जब शव पोस्टमार्टम के लिए ले जाया गया तो वकील व परिजनों ने गाड़ी के सामने आकर प्रदर्शन कर रास्ता भी जाम कर दिया। हालात बिगड़ते देख पोस्टमार्टम हाउस के आसपास भारी पुलिस बल और पीएसी तैनात की गई।
.....................