रामनगर। तहसील क्षेत्र में आवारा कुत्तों और बंदरों के बढ़ते हमलों से लोग दहशत में हैं। बीती एक फरवरी से लेकर 13 फरवरी के दौरान इलाके के करीब 740 लोगों को कुत्तों ने, 248 लोगों को बंदरों ने तथा 28 लोगों को बिल्ली ने अपना शिकार बनाकर काटा। इनमें से एक हजार लोग एंटी रैबीज वैक्सीन की डोज लगवाने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में पहुंचे। एंटी रेबीज टीकाकरण का दबाव बढ़ने से परेशानी भी बढ़ने लगी है।
रामनगर सीएचसी में प्रतिदिन 80 से 100 लोग एआरवी लगवाने पहुंच रहे हैं। पिछले दस दिनों में यहां करीब 1016 लोगों को एंटी रेबीज टीका लगाया जा चुका है। बढ़ती संख्या को देखते हुए अवकाश के दिनों में भी ओपीडी में एआरवी लगाया जा रहा है। कस्बा रामनगर सहित बिछलखा, सीहामऊ, ददौरा, गणेशपुर, मीतपुर, लोहटी जेई, अमलोरा, मनभावन पुरवा, निजामपुर, बेरिया, बुधेड़ा, रोटी गांव, पीतमपुर, कुरथरा और जलुहामऊ आदि गांवों से भी बड़ी संख्या में पीड़ित सीएचसी पहुंच रहे हैं।
वहीं, सूरतगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रतिदिन 40 से 50 लोगों को एंटी रेबीज इंजेक्शन लगाया जाता है। 1 से 13 फरवरी तक यहां 200 नए मरीज एआरवी लगवाने पहुंचे, जिनमें 156 कुत्ते, 15 बंदर और 10 बिल्ली के काटने के मामले शामिल हैं। जुरौंडा, अमराई, रानीगंज, शक्तिपुरवा, बसंतपुर लोधौरा, भिखारीपुर, कजियापुर और भैरमपुर सहित कई गांवों के लोग उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। महादेवा पीएचसी पर भी प्रतिदिन 20 से 25 लोगों को एंटी रेबीज टीका लगाया जा रहा है।
सीएचसी प्रभारी डॉ. प्रणव श्रीवास्तव ने बताया कि केंद्र पर एआरवी की पर्याप्त उपलब्धता है। उन्होंने सलाह दी कि कुत्ते या बंदर के काटने अथवा खरोंच लगने पर तुरंत घाव को साबुन और बहते पानी से अच्छी तरह धोकर अस्पताल पहुंचना चाहिए। इस दौरान घरेलू उपचार या झाड़-फूंक से बचते हुए एंटी रेबीज के सभी चार डोज समय पर अवश्य लगवाने चाहिए।