रामनगर (बाराबंकी)। गर्री गांव के बाबा मंशाराम स्वयं सहायता समूह की दीदियों का स्वावलंबन खुद की बनाई अगरबत्तियों से महक रहा है। घरेलू कामकाज निपटाने के साथ ही समूह की दीदियां प्रतिदिन दो घंटे की मेहनत कर अन्य महिलाओं में स्वावलंबन की अलख जगा रही हैं। दो घंटे के दौरान अगरबत्ती बनाकर समूही की एक दीदी हर दिन 70 से 100 रुपये तक की आमदनी कर लेती है।
इससे उनके परिवार की आर्थिक बदहाली भी दूर होने लगी है। साथ ही समूह का कारोबार बढ़ने से उसकी सफलता की कहानी भी दूसरे गावों तक पहुंचने से वहां की महिलाएं भी स्वरोजगार के लिए प्रेरित हो रहीं हैं। गर्री गांव की पिरोज सिंह ने पांच साल पहले बाबा मनसाराम स्वयं सहायता समूह का गठन किया था। धीरे-धीरे समूह की महिलाओं ने मिलकर अगरबत्ती बनाने का काम शुरू किया।
अगरबत्ती बनाने के लिए कच्चा माल, लिक्विड, सेंट, पेपर, तिल्ली, रैपर, पॉलिथीन आदि की खरीदारी लखनऊ से की जाती है। एक पैकेट की लागत लगभग तीन रुपये आती है। व्यापारियों को पैकेट सात से आठ रुपये में दिया जाता है। बाजार में यही पैकेट 10 से 20 रुपये में आसानी से बिक जाता है। गांव व आसपास के गांवों के लोग समूह से सीधे भी खरीदारी करते हैं।
समूह की महिलाएं व्यापारियों के आर्डर के हिसाब से सामग्री की खरीदारी करने के बाद अगरबत्ती तैयार कर सप्लाई करती हैं। समूह से जुड़ी गीता देवी ने बताया कि सभी महिलाएं मिलकर अगरबत्ती तैयार करती हैं। समूह की महिलाएं एक दिन में दो घंटे काम करके 70 पैकेट अगरबत्ती तैयार कर लेती हैं। इससे प्रत्येक महिला को हर दिन 100 रुपये तक की आय हो जाती है। पूजा ने बताया कि काम में कोई मुश्किल नहीं है। कमला, फूलमती, जयश्री आदि ने कहा कि समूह में काम करने से होने वाली आय घरेलू समस्याओं को दूर करने में मददगार साबित हो रही है। अगरबत्ती की खपत बढ़ने पर आय में और बढ़ोत्तरी होगी। (संवाद)