पढ़ने-लिखने व खेलने-कूदने की उम्र में स्कूल की पढ़ाई छोड़ नौनिहालों से सरकारी नर्सरियों में काम लिया जा रहा है। छह से दस साल के बच्चों से सागौन के पौधों को पॉलीथीन में भरवाया जाता है। इसके लिए नर्सरी के कर्मचारी इन नौनिहालों को मामूली रकम अदा कर रहे हैं।
नौनिहालों से मजदूरी की आड़ में ये कर्मचारी मोटी रकम भी डकार रहे हैं। मामले की जानकारी विभाग के अधिकारियों को भी है। बुधवार को जब महरूपुर प्राथमिक विद्यालय के कुछ बच्चे वन विभाग की नर्सरी में कार्य कर रहे थे, उस समय वन दारोगा भी मौजूद थे।
हरख रेंज की वन विभाग की नर्सरी हैदरगढ़-बाराबंकी मार्ग पर भानमऊ चौकी के पास स्थित है। यहां से करीब दो किमी. की दूर प्राथमिक विद्यालय महरूपुर है। बुधवार दोपहर इस नर्सरी पर विद्यालय के चार बच्चे काम रहे थे। बच्चों से सागौन की पौध को पॉलीथीन में भरवाने का काम लिया जा रहा था।
पूछताछ में बच्चों ने अपना नाम अजय (8), राहुल (10), सुशील (9) व जगजीवन (13) बताया। बच्चों ने बताया कि उनका घर मांझीपुर गांव में है। वे भी प्राथमिक विद्यालय महरूपुर के छात्र हैं। नर्सरी पर काम करने वाला नंदकिशोर काम के लिए उन्हें विद्यालय से बुलाकर लाया था। बच्चों ने दूर खड़े नंदकिशोर की ओर इशारा कर बताया कि ये हमारे साहब है। काम के लिए ये अक्सर स्कूल या घर से बुला ले जाते हैं।
नर्सरी में काम कर रहे राहुल, सुशील आदि ने बताया कि साहब एक पौधा पॉलीथीन में भरने के एवज में साठ पैसे मजदूरी देते हैं। इसके लिए पौधों को खोदने, उसे करीब 12 इंच की पॉलीथीन में रखने और मिट्टी में गोबर मिलाकर पॉलीथीन में भरने का काम करना होता है। शाम तक वे करीब 50 पौधे पॉलीथीन में भर देते हैं।
औसतन एक मजदूर करीब दो सौ रुपये की दिहाड़ी लेता है। मजदूर एक दिन में आठ घंटे काम करने के बाद करीब सौ पौधे ही पॉलीथीन में भरते हैं। ऐसे में बच्चों से काम कराने के बाद मजदूरों की मजदूरी दिखा कर मोटी रकम अंदर की जा रही है।
वन विभाग की इस नर्सरी पर रोजाना वन दारोगा व रेंजर का आना जाना रहता है। लेकिन इनकी नजर इन बच्चों पर नहीं पड़ती। लोगों का कहना है कि अधिकारी सब जानते हैं, यह खेल उनकी मिलीभगत से ही चल रहा है। बुधवार को जब स्कूली बच्चे नर्सरी में काम कर रहे थे उस समय भी वन दारोगा रामबीर भगत नर्सरी में मौजूद थे।