बाराबंकी। अनफिट स्कूली वाहनों की जांच का अभियान केवल शहरी क्षेत्र के कुछ इलाकों तक ही सिमटा दिख रहा है। ग्रामीण इलाकों में अनफिट स्कूली वाहनों की जांच न होने से वाहन मालिक बेखौफ हो इनका संचालन कर रहे हैं। इससे बच्चों की सुरक्षा दांव पर लगी है। कोटवाधाम क्षेत्र में एक निजी स्कूल की ऐसी ही जर्जर व अनफिट बस बीच रास्ते में खराब हो गई। बस में सवार बच्चों को स्कूल तक पहुंचाने के लिए ई-रिक्शा का सहारा लेना पड़ा।
ग्रामीण इलाकों में स्कूली वाहनों की फिटनेस जांच न होने से बच्चों को खटारा हो चुकी बसों से लाया जा रहा है। ऐसे में परिवहन विभाग द्वारा जिले में स्कूली वाहनों की जांच के लिए एक जुलाई से शुरू किया अभियान सवालों के घेरे में है। विभागीय टीम रस्म अदायगी के लिए शहर के कुछ इलाकों में जांच पड़ताल कर वाहनों का चालान करने की कार्रवाई तक सीमित बनी है।
बदोसराय थाना क्षेत्र के खजुरी चौराहे पर बुधवार सुबह बच्चों को स्कूल ले जा रही एक निजी स्कूल की बस अचानक खराब हो गई। जिसमें करीब 15 से 17 बच्चे सवार थे। बस में आई खराबी के कारण उन्हें ई रिक्शा से स्कूल भेजना पड़ा। स्थानीय लोगों ने बताया कि बस चालक ने पहले लोगों से धक्का लगा कर बस को स्टार्ट करने की कोशिश की। कुछ अभिभावकों द्वारा की गई इस मामले की शिकायत को स्कूल प्रबंधन व पुलिस ने नजर अंदाज कर दिया।