बाराबंकी के सूरतगंज क्षेत्र के हेतमापुर बंधे पर गुरुवार को निरीक्षण करने पहुंचे अपर जिलाधिकारी हरिकेश चौरसिया।
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एल्गिन-चरसड़ी तटबंध को बचाने के लिए बना कटवन (पुराने बंधे का शेष भाग) बृहस्पतिवार को नदी की धारा में समा गया है जिससे एल्गिन चरसरी तटबंध को खतरा और बढ़ गया है। मौके पर मौजूद बाढ़ खंड के अधिकारियों के हाथ पांव फूल गए हैं।
बांध को किस तरह से बचाया जाए, अधिकारी इसको लेकर माथापच्ची करने में लगे हैं। साथ ही मरम्मत का कार्य और तेज कर दिया गया है। वहीं नदी का पानी खतरे के निशान से अभी भी 62 सेमी ऊपर बह रहा है। तराई क्षेत्र के दो दर्जन से अधिक गांव अभी भी बाढ़ के पानी से भरे हुए हैं। वहीं एडीएम हरिकेश चौरसिया ने तराई हेतमापुर का भ्रमण कर बाढ़ पीड़ितों का हाल जाना।
घाघरा नदी पर बना एल्गिन-चरसड़ी तटबंध को बृहस्पतिवार को उस समय खतरा और बढ़ गया है जब इस बंधे को बचाने के लिए बना कटवन (पुराने बंधे का शेष भाग) नदी की धारा में समा गया है।
कटवन की वजह से अभी तक बांध को कोई विशेष खतरा नहीं था लेकिन अब नदी का पानी सीधे बंधे में ठोकर मारने लगा है। जिससे मौके पर मौजूद बाढ़ खंड के अधिकारियों के हाथ पांव फूल गए हैं अधिकारी बांध को बचाने के प्रयास में जुट गए हैं
इसके साथ ही स्परों की मरम्मत का कार्य और तेज कर दिया गया है जिससे बंधे को कटने से बचाया जा सके। यहां के लोगों का कहना है कि जैसे ही पानी कम हुआ नदी कटान करने लगती है और यदि तटबंध की ओर कटान शुरू हुई तो फिर बंधे को बचाना मुश्किल हो जाएगा। वहीं नदी के पानी का रुख देख बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के लोगों में दहशत का माहौल बना हुआ है।