सेवानिवृत्त आईपीएस राजेश पांडेय।
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सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी राजेश पांडे वैसे तो अपनी तेजतर्रार छवि और 80 से अधिक एनकाउंटर करने वाली टीम का हिस्सा रहने के लिए जाने जाते हैं लेकिन निजी जीवन में वह राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को अपना आदर्श मानते हैं। उनका चरखे से जुड़ाव चार दशक से है। एसटीएफ और एटीएस में सेवाएं देने के बाद राजेश वर्ष 2021 में सेवानिवृत्त हुए और तब से हर साल दो अक्तूबर को बाराबंकी के गांधी भवन में चरखा चलाकर सूत कातते हैं। लोक सेवक के तौर पर वे जहां भी तैनात रहे, गांधी जयंती के दिन वे वहीं गांधी भवन में जाकर सूत काटा करते थे।
राजेश पांडेय बताते हैं कि उनके पिता स्व. चंद्रप्रकाश पांडेय के करीबी दोस्त सुरेश राम भाई थे, जो सर्वोदय मूवमेंट के संस्थापक और गांधीवादी दार्शनिक थे। प्रयागराज के शहराबाद में स्थित सर्वोदय कुटीर में सुरेश राम भाई की लाइब्रेरी थी, जहां राजेश पांडेय प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के दौरान अपना काफी समय बिताते थे। करीब 40 साल पहले सुरेश राम भाई के मार्गदर्शन में ही उन्होंने चरखा चलाना सीखा था।
राजेश पांडेय के लिए खादी केवल एक वस्त्र नहीं बल्कि एक विचार है। वे गांधीजी के विदेशी वस्त्रों के बहिष्कार और स्वदेशी अपनाने के संदेश को चरखा चलाने के माध्यम से जीवित रखते हैं। उनका मानना है कि सूत कातना एकाग्रता बढ़ाता है और दिमाग को शांत रखता है। यह आर्थिक मॉडल भी अनूठा है, जो आत्मनिर्भरता और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देता है।
देश को आगे ले जाने के लिए आपसी भाईचारा जरूरी
गांधीवादी विचारों से प्रभावित होकर, राजेश पांडेय अपने बाराबंकी दौरे के दौरान देवा शरीफ में आयोजित गांधी जयंती समारोह में हिस्सा लेते हैं। वहां वे चरखा चलाकर शांति, अहिंसा और सांप्रदायिक सौहार्द का संदेश देते हैं। उनका मानना है कि अपराध और कानून-व्यवस्था को संभालते समय सख्ती जरूरी है लेकिन सामाजिक जीवन में गांधीवादी मूल्य, शांति, सूफी विचार और आपसी भाईचारा ही देश को आगे ले जा सकते हैं।
पुराने हनुमान मंदिर में संभाल रहे अहम जिम्मेदारी
पुलिस विभाग से आईजी (इलेक्शन सेल) के पद से सेवानिवृत्त होने के बाद राजेश पांडेय धार्मिक और प्रशासनिक सेवा की ओर बढ़े हैं। वह यूपीडा में सेवाएं दे रहे हैं। अयोध्या के श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सीईओ पद की दौड़ में उनका नाम शामिल रहा। वह लखनऊ में श्री महावीर जी ट्रस्ट (पुराने हनुमान मंदिर अलीगंज) में सेक्रेटरी भी हैं।