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नौकरी बचाने को जेब से लगा रहे पैसा

Wed, 22 Jul 2015 10:41 PM IST
बाराबंकी/अमर उजाला ब्यूरो
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जिले के अधिकांश विद्यालयों ने कोफ्ता चावल तो दूर दूध तक बच्चों को नसीब नहीं हो सका है। जहां दूध बंटा वहां प्रधानाचार्यों ने नौकरी बचाने के लिए अपने पैसे से दूध का इंतजाम किया। शासन दूध बांटने का आदेश तो दे दिया, लेकिन कनवर्जन कास्ट नहीं बढ़ाई। जिस कारण दूध वितरण में दिक्कत आ रही है।
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जिले में पूर्व माध्यमिक विद्यालयों की संख्या 846  है जिसमें करीब 94 हजार छात्र पंजीकृत हैं। वहीं प्राथमिक विद्यालयों की संख्या 2170 है जिसमें पौने तीन लाख छात्रों के पंजीकरण हुआ है।
सरकार द्वारा इन बच्चों को नए मीनू के अनुसार अब हर बुधवार को कोफ्ता चावल और प्रति छात्र को 200 एमएल दूध देने की योजना बीते बुधवार को शुरू की गई थी। एमडीएम के तहत प्रति बच्चे के हिसाब से प्राइमरी में तीन रुपये 59 पैसे और जूनियर में 5 रुपये 38 पैसे कनवर्जन कास्ट दी जाती है। जबकि, दो सौ एमएल दूध की कीमत लगभग नौ रुपये आती है।
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इसी कारण ज्यादातर स्कूलों में दूध नहीं पिलाया जाता। जहां वितरण हुआ भी वहां बच्चों को पानी मिला कर दूध पूरा किया गया या तो 200 की जगह 100 एमएल ही दूध दिया गया। अधिकांश परिषदीय विद्यालयों के बच्चे दूध के लिए मुंह ताकते रह गए। अब ये प्रधानाचार्य की मजबूरी है कि वो अपने जेब से दूध का इंतजाम करे।

नौकरी बचाने के लिए बांटा गया दूध
तहसील नवाबगंज व विकास खंड बंकी के प्राथमिक विद्यालय दरामनगर में बुधवार को नामांकन पखवारा मनाया गया। उसके बाद नामांकन में आए 51 बच्चों को गर्म दूध वितरण किया गया। विद्यालय की प्रधानाचार्य संगीता का कहना है एक बच्चे पर दूध का खर्च करीब 8-9 रुपये आता है लेकिन नौकरी बचाने के लिए मजबूरी में अपने पास से दूध खरीदकर बच्चों को वितरित कराया है।


दूध का इंतजार करते रहे बच्चे
विकास खंड फतेहपुर के प्राथमिक विद्यालय गुड़ौली में कुल 80 बच्चों का पंजीकरण है। अन्य दिनों के सापेक्ष बुधवार को ज्यादा संख्या में बच्चे उपस्थित हुए, लेकिन दूध तो दूर बच्चों को कोफ्ता चावल भी नहीं नसीब हुआ है। विद्यालय के प्रधानाचार्य हरीशचंद्र रावत ने बताया कि दूतध बांटने का काफी प्रयास किया गया लेकिन न गांव में दूध ही मिला और न ग्राम प्रधान ने कोई व्यवस्था की। जिससे बच्चे बिना दूध पीये ही वापस लौट गए। वहीं पूर्व माध्यमिक विद्यालय गुड़ौली में दूध ही कम पड़ गया जिससे आधे बच्चे दूध पीने से वंचित रहे गए।

छह लीटर दूध में निपटा दिए 50 बच्चे
विकास खंड सिद्घौर के प्राथमिक विद्यालय भेंडिया में 137 बच्चे पंजीकृत हैं जिसमें से बुधवार को मात्र 50 बच्चे ही उपस्थित हुए। स्कूल की प्राथानाचार्य सविता शुक्ला ने 50 बच्चों में दूध बांटने के लिए मात्र छह लीटर दूध ही खरीदा उनका कहना है कि उसी में पानी मिलाकर सभी बच्चों को दूध वितरण किया गया। वहीं पूर्व माध्यमिक विद्यालय भेंड़िया में 40 बच्चों में से मात्र 8 बच्चे ही उपस्थित रहे जिन्हें एक लीटर दूध में पिटाया गया।

दूध के नाम पर आ रहे बच्चे नहीं मिल रहा दूध
तहसील हैदरगढ के प्राथमिक विद्यालय मोतिकपुर में बच्चों की संख्या 102 है पहले इस विद्यालय में जहां बीस प्रतिशत ही बच्चे आते थे वहीं दूध मिलने की लालसा में बुधवार को यह संख्या बढ़कर 50 प्रतिशत हो गई। यहां के प्राधानाचार्य राजकुमार ने बताया कि आज बच्चों को सब्जी चावल व 48 बच्चों पर 5 लीटर दूध मंगाया गया था। वहीं प्राथमिक विद्यालय कादीपुर में 130 बच्चे पंजीकृत हैं मौके पर 52 बच्चे मौजूद रहे जिन्हें मात्र 6.5 लीटर दूध में पानी मिला कर 200 एमएल वाले गिलास में बांटा गया।

सर जी दूध नहीं यह तो पानी है
सिद्घौर क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय बबुरिहा में आए बच्चों को जीब दूध में पानी मिला कर दिया जाने लगा तो बच्चों ने एक सुर में कहा सर यह तो दूध नहीं पानी है। वहीं पूर्व माध्यमिक विद्यालय  मेनहुआ पलौली में 65 में से मात्र 20 बच्चे ही बुधवार को विद्यालय आए जिन्हें प्राधानाध्यपक मंशाराम ने तीन लीटर दूध बांट कर दूसरे बुधवार की औपचारिकता पूरी की।

बीएसए पीएन सिंह ने बताया कि बच्चों को दूध देने के लिए अलग से किसी बजट की व्यवस्था नहीं है। एमडीएम के तहत जो कनवर्जन कास्ट दी जा रही है। उसी में प्रधानाचार्य को इंतजाम करना है।

40 बच्चों के लिए दो लीटर दूध
विकास खंड हरख की ग्राम पंचायत गोठिया के गांव टांड़पुरवा के प्राथमिक विद्यालय में बुधवार के दिन बच्चों को मिलने वाले 200 एमएल दूध में ग्राम प्रधान ने अपना खेल दिखा दिया। स्कूल के हेड मास्टर कैम मेंहदी के अनुसार बुधवार के दिन 40 बच्चे पढ़ने आए हुए थे। जिनको बांटने के लिए ग्राम प्रधान पति कमलेश रावत ने मात्र दो लीटर दूध रसोईया के हाथ से भेज दिया। अब ऐसे में एक बच्चे को कितने मिली लीटर दूध रसोईया दे इसके लिए बांटने का समय भी निकलता जा रहा था। इसी तरह के हालात जैदपुर के प्राथमिक विद्यालय कन्या व इस्लामिया का रहा जहां पर पहले ही बुधवार को दूध नहीं बांटा गया था। दूसरे बुधवार को दूध आने का इंतजार मैडम करती रही, लेकिन न दूध आया और न बंटा बच्चे सिर्फ भोजन कर वापस लौट गए। इस संबंध में खंड शिक्षा अधिकारी आर के द्विवेदी ने बताया कि ब्लाक के 202 परिषदीय विद्यालयों के 182 स्कलों में दूध बांटा गया है जिन स्कूलों में दूध नहीं बाटा गया उसकी जांच कराई जाएगी।
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