बाराबंकी। बीमा कंपनी की दलील को खारिज करते हुए स्थाई लोक अदालत (अधिकरण) ने वादी गीता को पांच लाख रुपये की बीमा दावा राशि चुकाने का आदेश दिया है। न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी बीमा क्लेम की राशि के साथ ही गीता देवी को 10 हजार रुपये बतौर मुकदमा खर्च भी देगी।
अधिकरण की तीन सदस्यीय पीठ ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश की नजीर को आधार बनाते हुए बीमा दावा करने में की गई देरी की दलील को उचित नहीं माना। बड्डूपुर थाना क्षेत्र के टिकरा मजरे डफ्फरपुर गांव निवासी प्रमोद कुमार किसी काम से तीन फरवरी 2018 को लखनऊ गए थे। इस दौरान सड़क हादसे में प्रमोद की मौत हो गई। घटना लखनऊ जिले में हुई थी। प्रमोद की पत्नी गीता देवी का कोई ऐसा मददगार नहीं था, जो सही समय पर मुख्यमंत्री किसान दुर्घटना बीमा के क्लेम के लिए आवेदन करवाता।
क्लेम के लिए पोस्ट मार्टम रिपोर्ट, मृत्यु प्रमाण पत्र समेत अन्य कई तरह के अभिलेख भी जुटाने होते हैं। पति की मौत के दुख से उबरने के बाद गीता ने किसी तरह जरूरी अभिलेख जुटा कर बीमा दावे के लिए आवेदन किया। बीमा कंपनी ने यह कहते हुए दावा खारिज कर दिया कि इसके लिए आवेदन करने की चार माह की निर्धारित अवधि बीत चुकी है।
अपना हक पाने के लिए गीता देवी ने 18 जनवरी 2021 को सिविल कोर्ट के एडीआर भवन में संचालित स्थायी लोक अदालत अधिकरण में अपील दाखिल की। चार साल तक चली सुनवाई बाद अधिकरण न्यायिक बोर्ड के जज सत्यवीर सिंह यादव, सदस्य डॉ. अर्चना पांडेय व अरुणेश मिश्र की पीठ ने न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी को आदेश दिया कि वह गीता देवी को बीमित धनराशि पांच लाख रुपये के साथ ही अपील दायर होने की तिथि से आदेश की तिथि तक सात प्रतिशत ब्याज के साथ चुकाए। साथ ही 10 हजार रुपये मुकदमा खर्च भी दे। (संवाद)