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Barabanki News: स्ट्रिप की जगह पीला रंग पोतकर निभाई जा रही औपचारिकता

Sat, 21 Mar 2026 01:23 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
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बाराबंकी। जिले में सड़क सुरक्षा के दावों की जमीनी हकीकत डरावनी है। चिन्हित 14 ब्लैक स्पॉट (दुर्घटना संभावित क्षेत्र) पर नियमों को ताक पर रखकर केवल कागजी खानापूरी की जा रही है। हैरानी की बात यह है कि जिन रिपीटेड बार अलर्ट स्ट्रिप का काम वाहनों की रफ्तार थामना और चालकों को कंपन के जरिए सतर्क करना है, वे अब सिर्फ सड़क पर पीली लकीरें बनकर रह गई हैं। स्ट्रिप की जगह पीला रंग पोतकर औपचारिकता निभाई जा रही है।
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लखनऊ-अयोध्या मार्ग पर स्थित असेनी मोड़ और रामसनेहीघाट क्षेत्र का नरोखर मोड़ सबसे खतरनाक दुर्घटना संभावित क्षेत्र में शामिल हैं। नियमानुसार, इन स्थानों पर रिपीटेड बार अलर्ट स्ट्रिप उभरी हुई होनी चाहिए, ताकि जब वाहन उनके ऊपर से गुजरे तो चालक को एक विशेष कंपन महसूस हो और वह गति कम कर ले लेकिन वर्तमान में ये स्ट्रिप्स पूरी तरह घिस चुकी हैं। जिम्मेदार विभाग इन्हें दोबारा मानक के अनुसार बनाने के बजाय, घिसी हुई सतह पर ही पीला रंग पोतकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं।

इंडियन रोड कांग्रेस (आईआरसी) के स्पष्ट दिशा-निर्देश हैं कि प्रत्येक स्ट्रिप की ऊंचाई कम से कम 15 मिमी होनी चाहिए और इसमें उच्च गुणवत्ता वाले थर्मोप्लास्टिक पेंट व रिफ्लेक्टिव सामग्री का उपयोग अनिवार्य है। बाराबंकी में इन मानकों की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। उभरी हुई संरचना खत्म होने के कारण अब वाहनों को कोई कंपन महसूस नहीं होता, जिससे तेज रफ्तार वाहन अनियंत्रित होकर हादसों का शिकार हो रहे हैं। केवल रंग पोतने से स्ट्रिप्स रात के अंधेरे में चमकती तो हैं लेकिन वे सुरक्षा का वह बुनियादी उद्देश्य पूरा नहीं कर पातीं जिसके लिए उन्हें बनाया गया है।
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सवालों के घेरे में कार्यप्रणाली

सड़क निर्माण और रखरखाव की जिम्मेदारी संभालने वाले विभागों की इस कार्यशैली पर अब गंभीर सवाल उठ रहे हैं। आखिर क्यों बार-बार हादसों के बाद भी तकनीकी मानकों की अनदेखी की जा रही है। क्या विभाग किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह लापरवाही नहीं, बल्कि लोगों की जान के साथ सीधा खिलवाड़ है।
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ऐसी होती है रिपीटेड बार अलर्ट स्ट्रिप
रिपीटेड बार अलर्ट स्ट्रिप सड़क पर बनाई जाने वाली पीले रंग की समानांतर धारियां होती हैं, जो खासकर ब्लैक स्पॉट, तीखे मोड़, चौराहों या दुर्घटना-प्रवण क्षेत्रों में बनाई जाती हैं। इनका उद्देश्य वाहन चालकों को आगे खतरे के प्रति सचेत करना होता है। ताकि वाहन चालक गति को नियंत्रित कर सकें।
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बोले जिम्मेदार-
एनएचएआई के कंस्ट्रक्शन सेक्शन इंचार्ज राजीव रंजन ने बताया कि हाईवे पर वाहनों के लगातार आवागमन से रिपीटेड बार अलर्ट स्ट्रिप घिस जाती है। इसकी निगरानी की जाती है और उसे दुरूस्त कराया जाता है। जहां भी कमी पाई जाएगी उसे मानक के अनुरूप कार्य कराया जाएगा।
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