बाराबंकी। आजादी के बाद पहली बार बाराबंकी जिले के विकास के लिए सबसे बड़ी पहल हुई है। दिल्ली एनसीआर की तर्ज पर लखनऊ समेत छह जिलों को शामिल कर बनाए जा रहे राज्य राजधानी क्षेत्र (एससीआर) में पूरा बाराबंकी जिला आएगा। इसके लिए सीएम की अध्यक्षता में गठित कमेटी में बाराबंकी के डीएम भी पदेन सदस्य होंगे।
छह जिलों को मिलाकर बनाए जा रहे राज्य राजधानी क्षेत्र (एससीआर) में पहले बाराबंकी के बंकी, देवा, हरख व निंदूरा ब्लाकों के 234 गांव शामिल करने की तैयारी थी। बीते दिनों कैबिनेट की बैठक में इस पर मुहर लगने के बाद इसे लेकर आपत्तियां भी मांगी गई थी। इनके निस्तारण के बाद शुक्रवार को आवास एवं शहरी नियोजन विभाग ने एससीआर की अधिूसचना जारी की। अधिसूचना के अनुसार लखनऊ, हरदोई, सीतापुर, उन्नाव, रायबरेली व बाराबंकी को मिलाकर करीब 27826 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल एससीआर में शामिल होगा। इसमें बाराबंकी जिले का 4402 वर्ग किमी क्षेत्रफल आएगा।
जिला प्रशासन के अनुसार बाराबंकी का कुल क्षेत्रफल 3891.55 वर्ग किलोमीटर है। संभावना जताई गई है कि कभी बाराबंकी जिले में शामिल होने वाली अयोध्या जिले की रूदौली तहसील का हिस्सा भी इसमें जोड़ा जाएगा। जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने बताया कि इसे लेकर आगे की कार्रवाई शासन के निर्देशानुसार होगी।
चमचमाती सड़कें, मेट्रो की भी सौगात
एससीआर के बाद डिवाइडर वाली चमचमाती सड़कें, मेट्रो परियोजना, औद्योगिक गलियारा, विभिन्न प्रकार के उद्योगों की सौगात जिले को मिलेगी। साथ ही पूरे जिले का नियोजित तरह से विकास भी हो सकेगा। एससीआर की परिधि में बाराबंकी की करीब आठ लाख की आबादी आएगी। इसका असर पूरे जिले पर पड़ेगा।
पूरे क्षेत्र की होगी मैपिंग, बनेगी नियमावली
अनियोजित प्लाटिंग व कॉलोनियां के निर्माण पर अंकुश लगेगा। नियमावली बनाई जाएगी। इसी के तहत पूरे क्षेत्र की मैपिंग होगी। नाला-नाली निर्माण से लेकर सड़क बनाने तक के लिए जांच की प्रक्रिया से गुजरना होगा। आवासीय और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों तथा जमीनों के लिए कर का निर्धारण भी अलग से हो सकता है।