बाराबंकी। जिलेे में अनुबंधित बसों की निगरानी का काम कागजों पर ही हो रहा है। नियमों का पालन कराने में न तो अफसर रुचि दिखा रहे हैं और न ही आम लोगों में इसे लेकर जागरूकता नजर आ रही है। निगरानी के लिए बसों में जीपीएस तो लगाए गए लेकिन इसकी मॉनीटरिंग अभी तक शुरू नहीं हो सकी। इसके चलते ही करीब 23 फीसदी अनुबंधित बसे बिना जीपीएस सिस्टम के फर्राटा भर रही हैं।
हैरत की बात यह है कि इन बसों की निगरानी के लिए विभागीय स्तर पर अभी तक कोई कंट्रोलरूम तक नहीं बनाया गया है। जिले में 108 अनुबंधित बसों का संचालन को रहा है। इसमें 24 बसों में जीपीएस नहीं लगा है। बसों में ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (जीपीएस) लगने से संचालन के दौरान आसानी से बसों की लोकेशन की सटीक जानकारी मिलती है। इससे ड्राइवरों के रास्ते में सिर्फ निर्धारित स्टॉप पर ही बसें रोकने के साथ नियंत्रित गति से ही बस चलाते हैं।
जीपीएस सिस्टम से बसों की मॉनिटरिंग के लिए कंट्रोल रूम का होना भी जरूरी है। बसों में लगे जीपीएस के जरिए बस की लोकेशन लगातार एलसीडी स्क्रीन पर दिखाई देती है। लेकिन बस स्टेशन में कंट्रोल रूम नहीं बनाया गया है। जिससे बसों की लोकेशन आदि की जानकारी नहीं मिल पाती है। वाहन मालिक ही मोबाइल पर अपनी बसों की जानकारी लेते हैं विभाग को इसकी जानकारी नहीं मिल पाती है। एआरएम सुधा का कहना है कि कंट्रोल रूम नहीं बना है, इसके लिए उच्चाधिकारियों को पत्र भेजा जाएगा।
अनुबंधित बसों में एसओएस बटन भी नहीं लगाया जा रहा है। इसका फायदा यह होता कि रास्ते में दुर्घटना होने अथवा किसी के घायल होने, सड़क जाम, प्रदर्शन व अन्य आपदा की स्थिति में इस बटन को दबाकर ड्राइवर या यात्री कंट्रोल रूम से मदद मांग सकते हैं। कंट्रोल रूम को जैसे ही एसओएस के जरिए अलार्म मिलेगा, नजदीकी जगह से उसे मदद दिलाई जाएगी।