फतेहपुर (बाराबंकी)। आशिया बानो ने कभी नहीं सोचा था कि जिस दुपट्टे को वह सिर ढकने के लिए इस्तेमाल में लाती है, उसी की मदद से एक दिन वह लखपति दीदी बन जाएंगी। स्वयं सहायता समूह से जुड़ कर आशिया पहले खुद स्वावलंबी बनी फिर उसने गांव की एक दर्जन से अधिक महिलाओं को इस काम से जोड़कर आत्म निर्भर बनाया।
विकास खंड फतेहपुर क्षेत्र के हसनपुर टांडा में स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने आशिया बानो की अगुवाई में एक जिला एक उत्पाद में चयनित स्टोल (दुपट्टा) बनाने का काम शुरू किया। इन महिलाओं द्वारा बनाए जाने वाले दुपट्टा व स्टोल की मांग जिले के साथ ही दूसरे राज्यों में भी है। समूह की महिलाएं दुपट्टे में रंगाई-छपाई व गांठ लगाने के बाद उनकी पैकिंग का काम करती हैं।
समूह की महिलाएं जिला, प्रदेश व दूसरे राज्यों में होने वाले सरस मेला में अपना स्टाल जरूर लगाती हैं। आशिया ने बताया कि पांच वर्ष पूर्व स्टोल व दुपट्टा बनाने का कार्य शुरू किया था। इस कार्य में अच्छी कमाई होता देख अन्य महिलाओं को भी इस काम से जोड़ने शुरू किया। इससे अब समूह की सालाना आय तीन रुपये के पार होने लगी है। बताया कि जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हम जैसी समूह की महिलाओं को लखपति दीदी बनाने की बात कही थी, तो बड़ा अचरज हुआ था। लेकिन अब लगता है कि पीएम ने हम जैसी महिलाओं के आर्थिक उत्थान के लिए राष्ट्रीय आजीविका मिशन के तहत स्वयं सहायता समूहों के गठन की योजना को शुरू करा कर गांव की आम महिला को लखपति दीदी बनने का सपना पूरा किया है। (संवाद)