मरम्मत के अभाव में 125 से अधिक विद्यालय भवन पूरी तरह से जर्जर हो गए हैं। जिसके चलते इनमें पढ़ने वाले बच्चों को खुले आसमान के नीचे बैठाया जाता है या फिर अतिरिक्त कक्षों में क्लासें लगाई जाती हैं।
शासन से नए विद्यालय भवनों और जर्जर भवनों की मरम्मत के लिए पैसे की मांग तो की गई है लेकिन विभाग को अभी एक धेला तक नहीं मिला है जिसके चलते कई भवन ढहने की कगार पर पहुंच गए हैं।
जिले में करीब 125 विद्यालय भवन ऐसे हैं जिनमें बच्चों को बैठाकर पढ़ाना जान जोखिम में डालना है। मरम्मत न कराए जाने की वजह से यह विद्यालय इस हाल में पहुंच गए हैं। वहीं विभाग मरम्मत के लिए पैसा न मिलने की बात कहकर हाथ खडे़ कर रहा है।
जिससे इन विद्यालयों में तैनात शिक्षक या तो बच्चों को खुले आसमान के नीचे बिठाकर पढा रहे हैं या फिर विद्यालय परिसर में बने अतिरिक्त कक्षा कक्षों में बच्चों को बैठाया जा रहा है। जिससे विद्यालय आने वाले बच्चों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है
लेकिन उनकी भी मजबूरी है क्योंकि इसके अलावा वह कर भी क्या सकते हैं। जिसकी वजह से इन बच्चों को खुले आसमान और अतिरिक्त कक्षा कक्षों में बैठकर पढ़ाना पड़ रहा है।
अभी कुछ माह पूर्व फतेहपुर क्षेत्र के देवखरिया में बना प्राथमिक विद्यालय का गेट गिर जाने से इसकी चपेट में आकर एक बालक की मौत हो गई थी। जानकारी मिलने पर बीएसए ने भवन निर्माण प्रभारी को निलंबित करते हुए जवाब तलब किया था।
इसके अलावा करीब चार साल पहले निंदूरा ब्लॉक के सैंदर में एक निर्माणाधीन भवन की शटरिंग गिरने की वजह से छत में दरारें पड़ गई थीं।
हैदरगढ़ के डेहुवा निवासी मंशाराम रावत कहते हैं कि विभागीय लापरवाही की वजह से क्षेत्र के कई विद्यालय भवन जर्जर हैं। जिसकी वजह से बच्चों को इन विद्यालयों में भेजने की हिम्मत ही नहीं पड़ती। शाहपुर निवासी अनिल रावत कहते हैं कि जो भवन बनाए गए हैं उनकी गुणवत्ता इतनी खराब है कि वह निर्माण के बाद ही बदहाल स्थिति में पहुंच गए हैं।
इसके बाद भी बच्चाें को इन्हीं भवनों में बैठाकर पढ़ाया जा रहा है। मवैया निवासी अनिल शुक्ला कहते हैं कि क्षेत्र में जर्जर हो चुके भवनों की कई बार शिकायत अफसरों से की गई लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। डेहुवा निवासी मंजू देवी कहती हैं कि भवन जर्जर होने की वजह से बच्चों को खुले आसमान के नीचे बिठाया जाता हैै।
जिले में 48 प्राथमिक 119 जूनियर 500 अतिरिक्त कक्ष और 550 पुराने भवनों की मरम्मत के लिए पैसे की मांग शासन से की गई है। इसका प्रस्ताव भी भेजा जा चुका है। पैसा मिलते ही नए विद्यालय भवनों का निर्माण और मरम्मत शुरू करा दिया जाएगा। - पीएन सिंह, बीएसए