बाराबंकी में अतिक्रमण की गिरफ्त में घंटाघर।
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शहर के हृदयस्थली पर स्थित ऐतिहासिक धरोहर घंटाघर को अतिक्रमण से निजात मिलने की उम्मीद नहीं दिख रही। हाल यह है कि यह अब यह जगह सकरी गली के रूप में तब्दील होता जा रहा है। प्रशासन द्वारा घंटाघर को अतिक्रमण मुक्त करने के लिए अभियान तो बहुत चलाए गए लेकिन आज तक इस धरोहर को अतिक्रमण से मुक्ति नहीं मिल सकी।
अस्सी के दशक में घंटाघर के आसपास इतनी चौड़ी सड़क थी की एक साथ दो ट्रक इस पर चले जाएं। पर जैसे-जैसे समय बीता और आबादी बढ़ती गई उसके साथ-साथ शहर में स्थित ऐतिहासिक धरोहर घंटाघर अतिक्रमण का शिकार होता गया।
आज हाल यह है कि इसके आसपास पैदल निकलना भी मुश्किल है। घंटाघर के दो दरवाजों में अतिक्रमणकारी अपनी दुकानें बनाए हुए हैं। वहीं इसी के सामने बिजली विभाग ने ट्रांसफार्मर लगा इसे और बदसूरत बना दिया गया है।
आम दिनों में जब शहर की बाजार न हो तब भी इस घंटाघर के आसपास हमेशा जाम ही लगा रहता है। वहीं सट्टी बाजार के दिन तो इधर कोई जाना ही नहीं चाहता। प्रशासन द्वारा घंटाघर को अतिक्रमण से निजात दिलाने के लिए अभियान तो कई चलाए गए पर आज तक इस इलाके को अतिक्रमण मुक्त नहीं बनाया जा सका। प्रशासन द्वारा चलाए गए सभी अभियान घंटाघर से अतिक्रमण हटाने में फेल साबित हुए हैं।