लखनऊ। राजधानी समेत प्रदेश में चीनी मांझे से हो रही मौतों और लोगों के घायल होने के मामले पर हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने सोमवार को सख्त रुख अपनाया। न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ल की खंडपीठ ने चीनी मांझे की ऑनलाइन उपलब्धता रोकने के मुद्दे पर केंद्र सरकार को जवाब पेश करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही राज्य सरकार की ओर से पेश किए गए जवाब पर याचिकाकर्ता को पक्ष पेश करने के लिए समय दिया है। अगली सुनवाई 27 जुलाई को होगी।
इससे पहले मई में हुई सुनवाई पर हाईकोर्ट ने प्रदेश के गृह और कर विभाग के अपर मुख्य सचिवों/ प्रमुख सचिवों, पुलिस महानिदेशक, औद्योगिक विकास और पर्यावरण विभागों के प्रमुखों को 13 जुलाई को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पेश होने का आदेश दिया था। कोर्ट ने इन अफसरों से पूछा था कि पहले के आदेश के तहत चीनी मांझे के उत्पादन, बिक्री, इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने के लिए क्या कदम उठाए हैं और क्या कार्यप्रणाली तय की है? इस पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पेश अफसरों ने कोर्ट को जानकारी दी।
राज्य सरकार के मुख्य स्थायी अधिवक्ता ने बताया कि कोर्ट ने सभी अफसरों को आगे सुनवाई पर हाजिरी से छूट दे दी है। खंडपीठ ने यह आदेश स्थानीय अधिवक्ता मोतीलाल यादव की वर्ष 2018 में दाखिल जनहित याचिका पर दिया।
चीनी मांझे पर प्रतिबंध का बनेगा कानून
यूपी सरकार ने पिछली सुनवाई पर हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ को सूचित किया था कि घातक चीनी मांझे के निर्माण, बिक्री और इस्तेमाल को रोकने के लिए जल्द सख्त कानून लाया जाएगा। राज्य सरकार के मुख्य स्थायी अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया था कि नए कानून के तहत पीड़ितों को मुआवजा देने पर भी विचार किया जा रहा है।