बाराबंकी। दशलक्षण धर्म के सातवें दिन जैन मंदिर में बुधवार काे उत्तम तप धर्म पर्व मनाया गया। इस अवसर पर जुटे जैन समाज के श्रद्धालुओं ने अभिषेक पूजन कर सुख समृद्धि का आशीष मांगा। प्रवाचक ने कहा कि उत्तम तप धर्म का अर्थ केवल कठिन साधना या तपस्या ही नहीं होता है। स्वयं के द्वारा देव शास्त्र और गुरु की सेवा एवं सच्ची भक्ति करना भी तप धर्म ही कहलाता है। जब व्यक्ति अपनी इच्छाओं पर काबू पा लेता है तो वह भी एक उत्तम तप होता है।
सरावगी स्थित दिगंबर जैन मंदिर में बुधवार सुबह से ही केसरिया वस्त्रों से सुसज्जित महिलाएं व पुरुष पूजन अर्चन के लिए जुटने लगे थे। श्रद्धालुओं ने सर्वप्रथम प्रभु का अभिषेक पूजन किया। शाम को भगवान की भव्य आरती उतारी गई। शिखा बाकलीवाल व सेठी परिवार ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी। चिंतक इंद्र कुमार जैन ने कहा कि जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ ने करीब छह महीनों तक कठिन साधना की थी और परम आनंद मोक्ष को प्राप्त किया था।
इसके बाद आयोजित प्रश्नोत्तरी में विजेताओं को पुरस्कृत किया गया। फतेहपुर कस्बे के श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर, महावीर चैत्यालय व बेलहरा के श्री चंद्र प्रभु दिगंबर जैन मंदिर में पर्यूषण पर्व के दशलक्षण धर्म के सातवें दिन श्रद्धालुओं ने उत्तम तप धर्म का अंगीकार किया। मंदिर जी में अभिषेक, शांतिधारा की गई। केके जैन की देख रेख में धार्मिक ज्ञान प्रतियोगिता स्वाति जैन व वीना जैन द्वारा आयोजित कराई गई, जिसमें सभी प्रतिभागियों को जैन समाज की तरफ से पुरस्कृत किया गया। इस मौके पर बच्चों ने विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्त़ुत कर सभी का मन मोह लिया।